Saturday, February 14, 2026

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कैबिनेट ने पारित किया शुभांशु शुक्ला के सम्मान में प्रस्ताव, कहा – विकसित भारत के संकल्प को मिलेगी नई ऊर्जा

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से सफलतापूर्वक लौटे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक उपलब्धि को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सराहा है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में उनके सम्मान में प्रस्ताव पारित किया गया। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद कहा कि यह केवल एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि भारत के अंतरिक्ष भविष्य की मजबूत नींव है।

“पूरा देश गौरवान्वित, मिशन ने भारत को अंतरिक्ष स्टेशन के करीब पहुंचाया”
वैष्णव ने कहा कि शुभांशु शुक्ला का मिशन भारत के लिए गौरव और उत्सव का क्षण है। उन्होंने अंतरिक्ष में 18 दिन का ऐतिहासिक प्रवास पूरा किया और सफलता के साथ पृथ्वी पर लौटे।
उन्होंने कहा, “यह भारत को अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।”

वैज्ञानिकों को सराहना, युवाओं के लिए प्रेरणा
केंद्रीय मंत्री ने इस मौके पर इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को भी बधाई दी और कहा कि इस मिशन ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक नई दिशा दी है।
“यह मिशन सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्री की सफलता नहीं, बल्कि भारत की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है। इससे वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।”

2047 के लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को यह मिशन नई ऊर्जा और वैज्ञानिक दिशा देगा। इससे युवा पीढ़ी विज्ञान, रिसर्च और तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी बनने की ओर प्रेरित होगी।

17 अगस्त को लौटेंगे भारत
शुभांशु शुक्ला इस समय अंतरिक्ष मिशन के पोस्ट-मिशन प्रोटोकॉल के तहत हैं और भारत 17 अगस्त तक लौटेंगे। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही उनकी स्वदेश वापसी संभव होगी।

गगनयान मिशन की तैयारी को मिला बल
शुभांशु शुक्ला की इस उड़ान को भारत के बहुप्रतीक्षित गगनयान मिशन की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे भारत की मानवयुक्त अंतरिक्ष यात्रा की तैयारियों को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है।

शुभांशु शुक्ला का यह मिशन भारत के अंतरिक्ष इतिहास में नई इबारत लिख रहा है। कैबिनेट का यह प्रस्ताव न केवल एक वैज्ञानिक को सम्मानित करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को कल्पनाशील, नवाचारी और विज्ञान-केन्द्रित भारत की ओर प्रेरित भी करता है।

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