Wednesday, January 7, 2026

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कैंची धाम में ‘जेन-जी’ (Gen-Z) का उमड़ा सैलाब: बाबा नीब करौरी के दरबार में युवाओं की गहरी आस्था के पीछे क्या है बड़ी वजह?

नैनीताल (भवाली): उत्तराखंड के कुमाऊं की पहाड़ियों में स्थित बाबा नीब करौरी महाराज का ‘कैंची धाम’ इन दिनों एक नए सामाजिक बदलाव का केंद्र बना हुआ है। कभी शांति और साधना की तलाश में बुजुर्गों और सन्यासियों की शरणस्थली माना जाने वाला यह आश्रम, अब जेन-जी (Gen-Z) यानी 12 से 27 वर्ष की आयु वाले युवाओं की पहली पसंद बन गया है। मंदिर परिसर में लगने वाली युवाओं की लंबी कतारें और बाबा के प्रति उनका समर्पण समाजशास्त्रियों के लिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

आखिर क्यों खिंचे चले आ रहे हैं युवा?

कैंची धाम में युवाओं की इस बढ़ती भीड़ के पीछे कई दिलचस्प और गहरे कारण सामने आए हैं:

  • डिजिटल डिटॉक्स और मानसिक शांति: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और सोशल मीडिया के दबाव के बीच युवा शांति की तलाश में हैं। कैंची धाम का शांत वातावरण और वहां का ‘मौन’ उन्हें तनाव से मुक्ति दिलाने में मदद करता है।
  • टेक दिग्गजों का प्रभाव: स्टीव जॉब्स (Apple) और मार्क जुकरबर्ग (Meta) जैसे दिग्गजों द्वारा बाबा नीब करौरी की महिमा का गुणगान करने ने ग्लोबल स्तर पर युवाओं को प्रेरित किया है। युवा इसे केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि ‘सफलता के सूत्र’ के रूप में देख रहे हैं।
  • सोशल मीडिया और ‘स्पिरिचुअल रील’ संस्कृति: इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर कैंची धाम के वीडियो और बाबा के चमत्कारों की कहानियां वायरल होने से इस स्थान की लोकप्रियता युवाओं के बीच तेजी से बढ़ी है। अब युवाओं के लिए यहाँ आना एक ‘लाइफस्टाइल और स्पिरिचुअल ट्रेंड’ बन गया है।

सफलता और सादगी का संगम

कैंची धाम पहुंचे दिल्ली और बेंगलुरु के युवाओं का कहना है कि बाबा नीब करौरी की शिक्षाएं बहुत सरल हैं। बाबा आडंबरों के बजाय ‘मानव सेवा ही माधव सेवा’ पर जोर देते थे, जो आज की तर्कसंगत पीढ़ी को प्रभावित करती है। युवाओं का मानना है कि यहाँ आने के बाद उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन में एक सकारात्मक स्पष्टता (Clarity) आती है।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला बल

युवाओं की इस भारी भीड़ ने स्थानीय पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। भवाली और आसपास के क्षेत्रों के होटल, होमस्टे और टैक्सी संचालक साल भर व्यस्त रहने लगे हैं। प्रशासन के लिए अब चुनौती इस भीड़ को नियंत्रित करने और धाम की पवित्रता बनाए रखने की है।

 

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