केरल में पहली बार कमल खिलाने वाले सुरेश गोपी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा इनाम देते हुए मंत्रिमंडल में जगह देने का फैसला किया है। चुनाव प्रचार के दौरान गोपी ने मतदाताओं से वादा किया था कि अगर वे चुनाव जीतते हैं और भाजपा सत्ता में आती है, तो उन्हें मंत्री बनाया जाएगा। केरल के लोगों को उनका वादा झूठा न लगे इसी वजह से उन्हें पहली बार का सांसद होने के बावजूद पीएम मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में जगह दी है। अभिनेता से नेता बने सुरेश गोपी 250 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। 2016 मे उन्हें राष्ट्रपति ने राज्यसभा सदस्य नामित किया था, जिसके कुछ समय बाद ही वे भाजपा में शामिल हो गए। इन आठ वर्ष में उन्होंने राज्य में भाजपा का जनाधार बढ़ाने में खासी मदद की है और पहली बार कांग्रेस और सीपीएम के बीच बंटे राज्य में कमल खिलाया है। त्रिशूर में उन्होंने अपने चुनावी अभियानों में खुलकर इस बात का प्रचार किया था कि अगर वे और भाजपा जीतते हैं, तो उनका मंत्री बनना तय है। त्रिशूर में जगह-जगह दीवारों पर अब भी यह लिखा दिख जाएगा कि त्रिशूर के लिए एक कैबिनेट मंत्री, मोदी की गारंटी। गोपी ने चुनाव जीतने के बाद यह कहना शुरू कर दिया था कि वे मंत्री नहीं बनना चाहते, बल्कि केरल और तमिलनाडु के लोगों के लिए एक ऐसे प्रतिनिधि के तौर पर काम करना चाहते हैं, जिसकी सभी मंत्रालयों में सुनवाई हो। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वे किसी पार्टी के नेता से पहले राज्य की जनता के प्रतिनिधि हैं। गोपी का यह पहला चुनाव नहीं है, 2019 में भी वे त्रिशूर से चुनाव लड़े थे, लेकिन तीसरे स्थान पर रहे थे। तब कांग्रेस के टीपी प्रथपन ने चुनाव जीता था। हालांकि, 2014 में केरल में भाजपा का वोट शेयर 11.15 फीसदी था, जो 2019 में बढ़कर 28.2 फीसदी हो गया।





