Monday, January 12, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

केंद्रीय बजट: रविवार के बावजूद 1 फरवरी को ही पेश होगा लेखा-जोखा, सरकार ने तारीख बदलने से किया इनकार

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए केंद्रीय बजट (Union Budget) पेश करने की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सरकार की ओर से यह प्रस्ताव सामने आया है कि इस बार भी बजट 1 फरवरी को ही संसद के पटल पर रखा जाएगा। विशेष बात यह है कि आगामी 1 फरवरी को रविवार होने के बावजूद सरकार ने इसकी तारीख में किसी भी तरह का बदलाव न करने का निर्णय लिया है।

संसदीय परंपरा और निरंतरता पर जोर

आमतौर पर शनिवार या रविवार जैसे सार्वजनिक अवकाश के दिनों में संसद की कार्यवाही नहीं होती है, लेकिन बजट एक विशेष संवैधानिक और वित्तीय प्रक्रिया है। सूत्रों के अनुसार:

  • तारीख की गरिमा: सरकार पिछले कई वर्षों से 1 फरवरी को बजट पेश करने की परंपरा का पालन कर रही है, ताकि नए वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल) के शुरू होने से पहले विधायी प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
  • विशेष सत्र: रविवार को बजट पेश करने के लिए संसद का विशेष सत्र आहूत किया जाएगा। इससे पहले भी विशेष परिस्थितियों में सप्ताहांत (Weekends) पर बजट पेश किए जाने के उदाहरण रहे हैं।

हलवा समारोह और बजट की तैयारियां

बजट पेश करने की प्रक्रिया के हिस्से के रूप में जल्द ही वित्त मंत्रालय में पारंपरिक ‘हलवा समारोह’ का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद बजट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ‘लॉक-इन’ अवधि शुरू हो जाएगी, ताकि बजट की गोपनीयता बनी रहे।

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार भी अपना डिजिटल बजट पेश करेंगी, जिसे ‘यूनियन बजट ऐप’ पर भी देखा जा सकेगा।
  • यह बजट सरकार के भविष्य के आर्थिक विजन, टैक्स स्लैब में संभावित बदलाव और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर खर्च को लेकर बेहद अहम माना जा रहा है।

शेयर बाजार और वैश्विक प्रतिक्रिया

रविवार को बजट पेश किए जाने के फैसले का असर वित्तीय बाजारों पर भी पड़ेगा। हालांकि रविवार को शेयर बाजार बंद रहता है, लेकिन बजट की घोषणाओं का विश्लेषण करने के लिए निवेशकों को पर्याप्त समय मिलेगा, जिसका असर सोमवार को बाजार खुलने पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

विकसित भारत के लक्ष्य पर केंद्रित होगा बजट

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार के बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और मध्यम वर्ग को राहत देने वाली घोषणाओं पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। सरकार का लक्ष्य भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में कड़े और सुधारात्मक कदम उठाना है।

Popular Articles