केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के 5000 अधिकारियों और जवानों को विशेष साइबर कमांडो के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य देश की साइबर सुरक्षा तंत्र को और सक्षम बनाना है।
सूत्रों के अनुसार, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आधुनिक तकनीकी खतरों और साइबर अपराध से निपटने के लिए तैयार किया गया है। प्रशिक्षित कमांडो साइबर अपराध, डेटा सुरक्षा, नेटवर्क सुरक्षा और डिजिटल हमलों के प्रति प्रतिक्रिया देने में सक्षम होंगे। इस योजना के तहत CISF के जवानों को नवीनतम तकनीकों और उपकरणों से लैस किया जाएगा।
गृह मंत्रालय ने कहा कि डिजिटल दुनिया में सुरक्षा को लेकर चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। इसके लिए विशेष रूप से तैयार कमांडो राष्ट्रीय और महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों को साइबर हमलों से बचाने में मदद करेंगे। मंत्रालय का यह भी कहना है कि साइबर सुरक्षा में निवेश और प्रशिक्षित कर्मियों की संख्या बढ़ाने से राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी।
CISF के अधिकारियों के अनुसार, प्रशिक्षण के दौरान जवानों को सिमुलेशन, हैकिंग डिटेक्शन, नेटवर्क मॉनिटरिंग और साइबर थ्रेट एनालिसिस के विभिन्न मॉड्यूल से गुजरना होगा। इसके अलावा, डिजिटल फोरेंसिक और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली पर भी जोर दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में डिजिटल और नेटवर्क आधारित हमलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह कदम समय की मांग है। इससे न केवल सरकारी संस्थानों बल्कि निजी उद्योगों और critical infrastructure की सुरक्षा भी बढ़ेगी।
गृह मंत्रालय ने यह योजना राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति के तहत लागू करने का निर्णय लिया है। मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि प्रशिक्षित कमांडो किसी भी साइबर खतरे का सामना करने के लिए तत्पर रहेंगे और देश की डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
इस योजना के तहत CISF को न केवल प्रशिक्षण बल्कि तकनीकी संसाधनों और आधुनिक उपकरणों से भी लैस किया जाएगा। यह कदम देश में साइबर सुरक्षा के ढांचे को मजबूत करने और डिजिटल दुनिया में बढ़ते खतरों से निपटने के लिए अहम माना जा रहा है।





