बेंगलुरु, ब्यूरो। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के एक बयान ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बैंगलोर बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “कुर्सी ढूंढना मुश्किल होता है, लेकिन जब मिल जाए तो उस पर इस तरह बैठो कि फिर उठना न पड़े।”
राजनीतिक हलकों में इसे मुख्यमंत्री पद की ओर उनके इशारे के तौर पर देखा जा रहा है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में सत्ता-साझाकरण और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें लगातार चल रही हैं, हालांकि शिवकुमार और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया दोनों ही सरकार में किसी प्रकार के मतभेद से इनकार करते रहे हैं।
शिवकुमार के कई एलान, बार को मिलेगा समर्थन
इस मौके पर शिवकुमार ने केम्पेगौड़ा के नाम पर 10 एकड़ भूमि आवंटन, 5 करोड़ रुपये अनुदान, और वार्षिक केम्पेगौड़ा पुरस्कार जैसे कई योजनाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन को हर वर्ष 5 लाख रुपये की सहायता भी दी जाएगी।
सीएम सिद्धारमैया का जवाब – शिवकुमार की महत्वाकांक्षा जायज़
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा, “यह सच है कि शिवकुमार भी सीएम बनने की आकांक्षा रखते हैं, और इसमें कोई गलत बात नहीं है। लेकिन उन्होंने कभी नेतृत्व परिवर्तन की मांग नहीं की।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे 2028 तक कार्यकाल पूरा करेंगे और अगला विधानसभा चुनाव भी उन्हीं के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
सिद्धारमैया ने यह भी जोड़ा, “हम दोनों आलाकमान के आदेश के प्रति प्रतिबद्ध हैं, और सत्ता-साझाकरण पर कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है।”
पार्टी में नेतृत्व को लेकर फिर से हलचल
हालांकि दोनों नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर एकता और प्रतिबद्धता दिखाई है, लेकिन शिवकुमार की ‘कुर्सी’ संबंधी टिप्पणी ने कांग्रेस के अंदर भविष्य की रणनीति और नेतृत्व को लेकर फिर से चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस बयान के पीछे संगठनात्मक संतुलन और शक्ति प्रदर्शन का संकेत भी छुपा हो सकता है।





