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कुदरत की मार से किसानों के चेहरे पर छाई मायूसी: उत्तराखंड में असमय वर्षा और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान

देहरादून। अप्रैल के महीने में जहां चिलचिलाती धूप की उम्मीद थी, वहीं उत्तराखंड में बदले मौसम के मिजाज ने अन्नदाताओं की मुस्कान छीन ली है। देहरादून सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है। इस बेमौसम बदलाव का सबसे विनाशकारी प्रभाव रबी की मुख्य फसलों और राज्य के बागवानी क्षेत्र पर देखने को मिल रहा है।

खेतों में बिछ गई गेहूं की सुनहरी फसल

राज्य के मैदानी और तराई क्षेत्रों में इस समय गेहूं की फसल पूरी तरह पककर तैयार थी और कई जिलों में कटाई का काम जोरों पर था।

  • फसल का गिरना (Lodging): तेज अंधड़ और भारी बारिश के कारण तैयार गेहूं की बालियां खेतों में ही बिछ गई हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जलभराव और नमी के कारण अब दानों की चमक फीकी पड़ जाएगी और उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित होगी।
  • कटाई में बाधा: कटाई के पीक सीजन में हुई इस बारिश ने मशीनों (कंबाइन हार्वेस्टर) के काम को भी रोक दिया है, जिससे फसल के सड़ने का खतरा बढ़ गया है।

बागवानी पर भी मौसम का ‘वज्रपात’

पहाड़ी इलाकों में हो रहे हिमपात और ओलावृष्टि ने बागवानों की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।

  • फलों के झड़ने का डर: इस समय सेब, आड़ू, प्लम और खुबानी के पेड़ों पर फूल आने या फल बनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। ओलावृष्टि के कारण ये नाजुक फूल और छोटे फल पेड़ों से गिर रहे हैं, जिससे इस साल उत्पादन में भारी कमी आने की आशंका है।
  • तापमान में गिरावट: दून घाटी और आसपास के इलाकों में पारे के अचानक गिरने से लीची और आम के बौर (फूल) पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है।

पहाड़ों में हिमपात और मैदानों में ठिठुरन

पहाड़ी इलाकों में अप्रैल के महीने में हो रहे हिमपात ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है।

  • पशुपालन पर असर: अचानक लौटी कड़ाके की ठंड और ओलावृष्टि ने पशुपालकों के लिए चारे और सुरक्षा की समस्या पैदा कर दी है।
  • सब्जी उत्पादकों की चिंता: बेमौसम बारिश ने नकदी फसलों जैसे मटर, टमाटर और गोभी की खेती करने वाले किसानों को भी काफी आर्थिक चोट पहुँचाई है।

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