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कुदरत का अजूबा: अफगानिस्तान से भारत तक फैला 1000 किमी लंबा ‘रेन बैंड’; बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से वैज्ञानिक हैरान

नई दिल्ली (20 मार्च, 2026): दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने मौसम के मिजाज को पूरी तरह बदल दिया है। मार्च के महीने में, जब सूरज की तपिश बढ़ने लगती है, तब अचानक हुई इस ‘वॉटर बॉम्बिंग’ ने न केवल आम जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि मौसम वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल दिया है। भारत के साथ-साथ पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी कुदरत का यही रूप देखने को मिल रहा है, जिसके पीछे 1,000 किलोमीटर लंबा एक विशाल ‘रेन बैंड’ जिम्मेदार बताया जा रहा है।

1000 किमी लंबा ‘रेन बैंड’: क्या है यह आसमानी रेखा?

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस समय आसमान में एक दुर्लभ और असामान्य घटना घट रही है:

  • विशाल फैलाव: अफगानिस्तान से शुरू होकर पाकिस्तान के रास्ते भारत तक एक सीधी रेखा में निम्न दबाव वाला क्षेत्र बना है। इसे ही ‘1000 किलोमीटर लंबा रेन बैंड’ कहा जा रहा है।
  • साइक्लोनिक सर्कुलेशन: वर्तमान में उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर ऊपरी हवा का एक शक्तिशाली ‘साइक्लोनिक सर्कुलेशन’ सक्रिय है। यह चक्रवात जैसा सिस्टम नमी को सोखकर भारी बारिश और ओलावृष्टि को जन्म दे रहा है।

ठिठुरा मार्च: 7 डिग्री तक गिरा पारा

इस बेमौसम बारिश का सबसे सीधा असर तापमान पर पड़ा है:

  1. तापमान में भारी गिरावट: पिछले 48 घंटों में दिल्ली और आसपास के राज्यों में पारा 7 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है।
  2. दोबारा लौटी ठंड: पंखे और एसी चलाने की तैयारी कर रहे लोगों को एक बार फिर गर्म कपड़े निकालने पड़े हैं। सुबह और रात के समय जनवरी जैसी सिहरन महसूस की जा रही है।
  3. ओलावृष्टि का कहर: पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कई हिस्सों में चने के आकार के ओले गिरे हैं, जिससे खड़ी फसलों को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का बदला व्यवहार

वैज्ञानिकों की चिंता का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ का समय और व्यवहार है:

  • सामान्य पैटर्न: आमतौर पर भूमध्य सागर से उठने वाले ये विक्षोभ दिसंबर से फरवरी के बीच सक्रिय होते हैं और पहाड़ों पर बर्फबारी व मैदानी इलाकों में शीत लहर लाते हैं।
  • असामान्य देरी: इस साल यह सिस्टम मार्च के उत्तरार्ध में सक्रिय हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ग्लोबल वार्मिंग और बदलते जलवायु पैटर्न (Climate Change) का एक बड़ा और खतरनाक संकेत है।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान में भी तबाही

यह मौसमी सिस्टम केवल भारत तक सीमित नहीं है:

  • पड़ोसी देशों का हाल: अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी हुई है, जिससे रास्ते बंद हो गए हैं। वहीं, पाकिस्तान के पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में तेज आंधी और बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।

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