नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के बहुचर्चित मामले में नामजद तीन आरोपितों को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपितों की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही, न्यायालय ने राज्य सरकार और संबंधित पुलिस प्रशासन को नोटिस जारी कर इस पूरे प्रकरण पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद मामले में पुलिस की तत्काल कार्रवाई पर विराम लग गया है, जिससे क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उधम सिंह नगर जिले के एक किसान, सुखवंत सिंह की दुखद आत्महत्या से जुड़ा है:
- घटना का विवरण: कुछ समय पूर्व किसान सुखवंत सिंह ने मानसिक तनाव और कथित प्रताड़ना के चलते आत्महत्या कर ली थी। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया था कि सुखवंत सिंह को कुछ व्यक्तियों द्वारा लगातार धमकाया जा रहा था और आर्थिक रूप से परेशान किया जा रहा था।
- एफआईआर (FIR): परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों सहित तीन लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 306) का मुकदमा दर्ज किया था।
कोर्ट में आरोपितों की दलील
आरोपितों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उनके वकीलों ने कोर्ट के समक्ष निम्नलिखित तर्क रखे:
- राजनीतिक द्वेष: याचिकाकर्ताओं का दावा है कि उन्हें इस मामले में राजनीतिक रंजिश के तहत गलत तरीके से फंसाया गया है।
- सबूतों का अभाव: कोर्ट को बताया गया कि पुलिस के पास ऐसे कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं जो यह साबित कर सकें कि आरोपितों ने किसान को सीधे तौर पर आत्महत्या के लिए मजबूर किया था।
- जांच में सहयोग: आरोपितों ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि वे जांच में पूरी तरह सहयोग करेंगे, इसलिए उनकी गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है।
हाईकोर्ट का सख्त रुख और निर्देश
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए यह आदेश पारित किया:
- गिरफ्तारी पर रोक: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं होती और पुलिस अपनी रिपोर्ट पेश नहीं करती, तब तक आरोपितों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
- पुलिस को हिदायत: न्यायालय ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे निष्पक्षता से साक्ष्य जुटाएं और किसी भी दबाव में आकर कार्रवाई न करें।
- अगली सुनवाई: इस मामले की अगली सुनवाई अब चार सप्ताह बाद तय की गई है।
क्षेत्र में तनाव और परिजनों की मांग
इस आदेश के बाद मृतक सुखवंत सिंह के परिजनों और स्थानीय किसान संगठनों में निराशा देखी जा रही है।
- परिजनों का पक्ष: मृतक के परिवार का कहना है कि आरोपितों की गिरफ्तारी न होने से जांच प्रभावित हो सकती है और उन्हें न्याय मिलने में देरी होगी।
- किसान संगठनों का प्रदर्शन: क्षेत्र के कई किसान संगठनों ने सुखवंत सिंह के लिए न्याय की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच की अपील की है।
“हमने कोर्ट के समक्ष सभी तथ्य रख दिए हैं। हमें पूरा विश्वास है कि पुलिस जांच में याचिकाकर्ताओं की बेगुनाही साबित होगी। अंतरिम रोक न्याय प्रक्रिया का हिस्सा है।” — बचाव पक्ष के अधिवक्ता





