बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बुधवार को घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी जातिगत जनगणना के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करेगी। यह फैसला ओबीसी सलाहकार परिषद की बैठक में लिया गया, जिसमें तेलंगाना के जाति सर्वेक्षण को मॉडल मानते हुए राष्ट्रीय स्तर पर जातिगत जनगणना की मांग की गई।
मुख्यमंत्री ने इस घोषणा को ‘बंगलूरू डिक्लेरेशन’ का नाम देते हुए कहा कि प्रस्तावित जनगणना केवल संख्या तक सीमित न रहकर प्रत्येक व्यक्ति और जाति के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, रोजगार और राजनीतिक पहलुओं को भी कवर करेगी।
तीन अहम प्रस्ताव पारित
बैठक में तीन प्रमुख प्रस्ताव पारित किए गए:
1. जातिगत जनगणना का राष्ट्रीय स्तर पर आयोजन, तेलंगाना मॉडल के आधार पर।
2. 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा समाप्त कर ओबीसी वर्ग को समुचित प्रतिनिधित्व और अवसर सुनिश्चित करना।
3. संविधान के अनुच्छेद 15(4) के तहत निजी शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी आरक्षण लागू करने की मांग।
राहुल गांधी को बताया ‘न्याय योद्धा’
सिद्धारमैया ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को “न्याय योद्धा” बताते हुए कहा कि उन्होंने वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई, जिससे “मनुवादी मोदी सरकार” को जातिगत जनगणना की मांग के आगे झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय सामाजिक न्याय की दिशा में पहला कदम है, जो संविधान की भावना के अनुरूप है।
मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि राहुल गांधी के साहसी और अडिग नेतृत्व में भारत एक समतामूलक समाज की दिशा में आगे बढ़ेगा।
इस घोषणापत्र के जरिए कांग्रेस ने ओबीसी वर्गों और सामाजिक न्याय को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाने का प्रयास किया है, जो आगामी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।





