नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वेस्ट एशिया शांति योजना के पहले चरण का समर्थन करने और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सराहना करने पर कांग्रेस पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के बयान को “शर्मनाक और नैतिक रूप से निंदनीय” करार दिया है।
कांग्रेस का आरोप — गाजा के नरसंहार पर चुप्पी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने गाजा को लेकर हुए नए समझौते का स्वागत किया और ट्रंप की सराहना की, जो आश्चर्यजनक नहीं है। लेकिन नेतन्याहू की बिना शर्त तारीफ करना, जिन्होंने “गाजा में बीस महीनों से नरसंहार मचाया है”, बेहद शर्मनाक और नैतिक रूप से निंदनीय है।
रमेश ने कहा,
“मोदी सरकार ने फलस्तीन के स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के भविष्य पर अब तक चुप्पी साध रखी है। भारत ने 1988 में ही फलस्तीन को मान्यता दे दी थी और आज 150 से अधिक देश इसे मान्यता दे चुके हैं, लेकिन केंद्र सरकार उस नीति से मुंह मोड़ चुकी है।”
‘वेस्ट बैंक पर इस्राइली कब्जे पर भी कुछ नहीं कहा’
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने वेस्ट बैंक में इस्राइली बस्तियों के लगातार विस्तार पर भी कोई टिप्पणी नहीं की।
“यह खेदजनक है कि भारत, जिसने हमेशा फलस्तीन के स्वराज और शांति के पक्ष में खड़ा होकर नैतिक नेतृत्व दिखाया, अब चुप है। मोदी सरकार अंतरराष्ट्रीय नैतिकता और भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति से भटक गई है।”
क्या कहा था प्रधानमंत्री मोदी ने
मामला तब सुर्खियों में आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यपूर्व शांति पहल के पहले चरण का समर्थन करते हुए कहा था—
“हम राष्ट्रपति ट्रंप की शांति योजना के पहले चरण पर बनी सहमति का स्वागत करते हैं। यह इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मजबूत नेतृत्व का प्रतीक है।”
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि,
“हमें उम्मीद है कि बंधकों की रिहाई और गाजा के लोगों को मिल रही मानवीय सहायता से उन्हें राहत मिलेगी और इससे स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।”
क्या है ट्रंप की ‘वेस्ट एशिया शांति योजना’
यह समझौता इस्राइल और हमास के बीच लंबे समय से जारी युद्ध में अब तक की सबसे बड़ी प्रगति माना जा रहा है। इसके तहत गाजा में युद्धविराम, कुछ बंदियों की रिहाई और मानवीय सहायता बढ़ाने पर सहमति बनी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इसे “शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम” बताया था।
कांग्रेस की मांग — भारत अपने रुख को स्पष्ट करे
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि वे भारत की पारंपरिक विदेश नीति के अनुरूप अपना रुख स्पष्ट करें और फलस्तीन के स्वतंत्र राष्ट्र के अधिकार पर दोबारा समर्थन जताएं। पार्टी नेताओं का कहना है कि भारत को “मानवीय मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय न्याय” के साथ खड़ा रहना चाहिए, न कि “आक्रामक नेतृत्व की तारीफ” करनी चाहिए।
पृष्ठभूमि: भारत की पुरानी नीति
भारत ने नवंबर 1988 में फलस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी थी। दशकों तक भारत ने ‘दो-राष्ट्र सिद्धांत’ का समर्थन करते हुए इस्राइल और फलस्तीन दोनों के बीच शांति और सहअस्तित्व की नीति अपनाई थी। हालांकि हाल के वर्षों में भारत और इस्राइल के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी और कृषि सहयोग में तेजी आई है।
प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी ने जहां भारत-इस्राइल संबंधों को और मजबूती देने का संकेत दिया, वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे भारत की विदेश नीति से विचलन बताया है। गाजा संघर्ष की पृष्ठभूमि में यह बयान न केवल राजनीतिक बल्कि राजनयिक बहस का विषय बन गया है।





