Saturday, January 31, 2026

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कर्नाटक में अश्लील वीडियो कांड पर बड़ी कार्रवाई: डीजीपी रामचंद्र राव सस्पेंड; सरकार ने कहा- ‘जांच में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं’

बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने अश्लील वीडियो स्कैंडल मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा कदम उठाते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और डीजीपी रामचंद्र राव को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। उन पर इस संवेदनशील मामले की जांच में लापरवाही बरतने, साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना और कथित तौर पर आरोपियों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगे हैं। राज्य के गृह मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस कांड ने कर्नाटक की छवि को धूमिल किया है, इसलिए सरकार ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उच्च पदस्थ अधिकारियों पर गाज गिराना शुरू कर दिया है। रामचंद्र राव के निलंबन के बाद अब पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और इस मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का पुनर्गठन किया जा रहा है।

निलंबन के पीछे के प्रमुख कारण

सरकार और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, डीजीपी रामचंद्र राव के खिलाफ कई बिंदु सामने आए थे:

  • जांच में ढिलाई: आरोप है कि जब यह वीडियो कांड पहली बार सामने आया, तब डीजीपी कार्यालय ने शुरुआती शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे मुख्य आरोपियों को फरार होने का मौका मिल गया।
  • गोपनीयता का उल्लंघन: जांच के दौरान कुछ गोपनीय दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य लीक होने की बात भी सामने आई है, जिसका सीधा संबंध शीर्ष अधिकारियों की निगरानी से जोड़ा जा रहा है।
  • प्रशासनिक जवाबदेही: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया है कि इतने बड़े कांड में प्रशासनिक विफलता की जिम्मेदारी तय की जानी जरूरी थी, और विभाग के प्रमुख होने के नाते रामचंद्र राव अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।

क्या है यह अश्लील वीडियो कांड?

यह मामला पिछले कुछ हफ्तों से कर्नाटक की राजनीति और सामाजिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है:

  1. हजारों वीडियो क्लिप्स: आरोप है कि एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़े व्यक्तियों ने महिलाओं के हजारों अश्लील वीडियो रिकॉर्ड किए और उनका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया।
  2. हाई-प्रोफाइल आरोपी: इस मामले में कई रसूखदार नाम सामने आए हैं, जिसके चलते विपक्ष लगातार सरकार पर ‘कवर-अप’ करने का आरोप लगा रहा था।
  3. एसआईटी (SIT) की जांच: मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) पहले से ही कई गिरफ्तारियां कर चुका है, और अब डीजीपी के निलंबन से जांच की दिशा और भी सख्त होने की उम्मीद है।

विपक्ष का हमला और सरकार की सफाई

डीजीपी के निलंबन के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है:

  • विपक्ष की मांग: भाजपा और जेडीएस ने इस कार्रवाई को ‘देर से लिया गया फैसला’ बताया है और मांग की है कि इस मामले की सीबीआई (CBI) जांच होनी चाहिए।
  • सरकार का रुख: राज्य सरकार ने कहा है कि निलंबन यह साबित करता है कि वे किसी को भी नहीं बचा रहे हैं, चाहे वह कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो। सरकार का ध्यान अब उन महिलाओं को न्याय दिलाने पर है जो इस घिनौने कृत्य का शिकार हुई हैं।

 

डीजीपी स्तर के अधिकारी का निलंबन कर्नाटक के प्रशासनिक इतिहास की बड़ी घटनाओं में से एक है। यह कार्रवाई अन्य अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि संवेदनशील मामलों में किसी भी प्रकार की कूटनीतिक या राजनीतिक रियायत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में रामचंद्र राव के खिलाफ विभागीय जांच और भी कई राज खोल सकती है।

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