देहरादून। उत्तराखंड विद्युत लोकपाल (Electricity Ombudsman) ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि केवल संपत्ति विवाद के आधार पर किसी किरायेदार या वैध उपभोक्ता को बिजली कनेक्शन से वंचित नहीं किया जा सकता। लोकपाल ने कहा कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा को किसी भी प्रकार के निजी या कानूनी विवाद का हथियार नहीं बनाया जा सकता।
मामले में शिकायतकर्ता ने बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था, लेकिन संबंधित बिजली वितरण कंपनी ने यह कहते हुए कनेक्शन देने से इनकार कर दिया कि संपत्ति पर स्वामित्व को लेकर विवाद चल रहा है। इस पर उपभोक्ता ने लोकपाल के समक्ष अपील की।
सुनवाई के दौरान लोकपाल ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति में वैध रूप से निवास कर रहा है या किरायेदार के रूप में रह रहा है, तो उसे बिजली जैसी आवश्यक सेवा से वंचित नहीं किया जा सकता। आदेश में कहा गया कि आधुनिक जीवन में बिजली के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती, इसलिए इसे एक आवश्यक सेवा के रूप में देखा जाना चाहिए।
लोकपाल ने यह भी कहा कि बिजली कनेक्शन देना या न देना संपत्ति के स्वामित्व को प्रभावित नहीं करता है। यदि संपत्ति विवाद न्यायालय में लंबित है, तो भी बिजली आपूर्ति को रोका नहीं जा सकता। संबंधित बिजली कंपनी को निर्देश दिया गया कि वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपभोक्ता को कनेक्शन प्रदान करे।
इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि कानूनी विवादों का असर आम नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं पर न पड़े।
विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय ऐसे मामलों में मिसाल बन सकता है, जहां मकान मालिक और किरायेदार या सह-स्वामित्व विवादों के कारण आवश्यक सेवाओं में बाधा उत्पन्न होती है।





