इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के इतिहास में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। हालिया रिपोर्टों और खुफिया दस्तावेजों के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने भारत के संभावित सैन्य एक्शन, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) का नाम दिया गया था, को रोकने के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के सामने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। बताया जा रहा है कि इस ऑपरेशन के डर से पाकिस्तानी हुक्मरान और सैन्य अधिकारी इतने घबराए हुए थे कि उन्होंने अमेरिका में भारी लॉबिंग और करोड़ों रुपये खर्च किए।
60 से अधिक गुप्त बैठकें और करोड़ों की ‘लॉबिंग’
खुलासे के मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारियों और वाशिंगटन में उनके पैरवीकारों (Lobbyists) ने ट्रंप प्रशासन के प्रभावशाली नेताओं के साथ 60 से ज्यादा बैठकें की थीं। इन बैठकों का एकमात्र एजेंडा भारत को किसी भी बड़े सैन्य हमले से रोकना था। रिपोर्टों के अनुसार:
- पाकिस्तान ने अमेरिकी थिंक-टैंक और नीति निर्माताओं को प्रभावित करने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च किए।
- पाकिस्तानी राजनयिकों ने पेंटागन और व्हाइट हाउस के चक्कर लगाए ताकि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की संभावना को खत्म किया जा सके।
क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’?
माना जाता है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तैयार की गई एक गुप्त रणनीति थी, जिसका उद्देश्य सीमा पार आतंकी बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट करना था। पुलवामा हमले और बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान को अंदेशा था कि भारत एक और बड़े और निर्णायक हमले की योजना बना रहा है। पाकिस्तान को डर था कि इस बार भारत की कार्रवाई केवल सर्जिकल स्ट्राइक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह एक व्यापक सैन्य अभियान हो सकता है।
ट्रंप के सामने गिड़गिड़ाने की नौबत
सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान ने तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी। पाकिस्तान ने दलील दी थी कि भारत का यह कदम पूरे दक्षिण एशिया को अस्थिर कर सकता है और परमाणु युद्ध की स्थिति पैदा कर सकता है। तत्कालीन पाकिस्तानी नेतृत्व ने ट्रंप के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए शांति की भीख मांगी थी ताकि वे भारत को पीछे हटने के लिए मजबूर कर सकें।
कूटनीतिक विफलता या मजबूरी?
इस खुलासे ने पाकिस्तान की उस छवि को बेनकाब कर दिया है जहाँ वह दुनिया के सामने अपनी सैन्य ताकत का बखान करता है, लेकिन पर्दे के पीछे उसे भारतीय सेना के जवाब का डर सताता रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ‘प्रो-एक्टिव’ डिफेंस पॉलिसी ने पाकिस्तान को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है, जिसके कारण उसे अपने बचाव के लिए विदेशी शक्तियों के सामने घुटने टेकने पड़ रहे हैं।





