नई दिल्ली: भारत और 27 देशों के शक्तिशाली समूह यूरोपीय संघ (EU) के बीच करीब दो दशक से चल रहा इंतजार आज खत्म हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘ऐतिहासिक क्षण’ और भारत के ‘विकसित भारत’ के संकल्प की दिशा में सबसे बड़ा कदम बताया है। इस समझौते से भारत और यूरोप के बीच व्यापार की सभी बाधाएं खत्म हो जाएंगी, जिससे देश में विदेशी निवेश की बाढ़ आने और लाखों रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
पीएम मोदी का बड़ा एलान: “खुलेगा समृद्धि का नया द्वार”
समझौते की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह डील केवल व्यापारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि दो महान लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच अटूट विश्वास का प्रतीक है।
- टैरिफ से मुक्ति: पीएम ने एलान किया कि इस समझौते के तहत 90% से अधिक उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क (Duty) को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा।
- स्वदेशी उत्पादों को वैश्विक मंच: उन्होंने जोर देकर कहा कि अब भारत के किसानों द्वारा उगाए गए उत्पाद और लघु उद्योगों (MSMEs) के सामान बिना किसी अतिरिक्त टैक्स के पेरिस, बर्लिन और रोम के बाजारों में बिक सकेंगे।
आम उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी: क्या-क्या होगा सस्ता?
इस मेगा डील का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। यूरोपीय देशों से आने वाली कई प्रीमियम वस्तुएं अब भारतीय बाजार में काफी सस्ती मिलेंगी:
- लग्जरी कारें और गैजेट्स: जर्मनी और इटली की लग्जरी कारों के साथ-साथ यूरोपीय तकनीक वाले इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के दाम काफी गिरेंगे।
- वाइन, चॉकलेट और डेयरी: फ्रांस की वाइन और स्विट्जरलैंड की चॉकलेट जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क कम होने से इनकी कीमतें कम होंगी।
- मशीनरी और दवाएं: हाई-टेक यूरोपीय मशीनरी और जीवन रक्षक दवाओं के सस्ते होने से भारतीय स्वास्थ्य और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेंगे ये बड़े फायदे
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता भारत को एक ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने में मदद करेगा:
- निर्यात में उछाल: भारत के टेक्सटाइल, चमड़ा, रत्न-आभूषण और आईटी सेक्टर को यूरोप के 45 करोड़ से अधिक संपन्न उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच मिलेगी।
- विदेशी निवेश (FDI): ईयू की कंपनियां अब भारत में बड़े स्तर पर फैक्ट्रियां लगाने और तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) करने के लिए प्रोत्साहित होंगी।
- रोजगार के अवसर: वाणिज्य मंत्रालय का अनुमान है कि इस डील से अगले 5 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में करीब 20 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।
चीन को बड़ी चुनौती और रणनीतिक स्वायत्तता
यह समझौता रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- सप्लाई चेन का विविधीकरण: भारत और यूरोप ने इस डील के जरिए चीन पर अपनी व्यापारिक निर्भरता को कम करने का स्पष्ट संदेश दिया है।
- डिजिटल और ग्रीन पार्टनरशिप: समझौते में भविष्य की तकनीक, जैसे ग्रीन हाइड्रोजन और डेटा प्रोटेक्शन पर भी विशेष सहयोग की बात कही गई है।
18 साल का संघर्ष और सफलता
बता दें कि इस समझौते के लिए बातचीत साल 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई तकनीकी और राजनीतिक कारणों से यह अधर में लटकी हुई थी। 2021 में पीएम मोदी की पहल पर इसे दोबारा शुरू किया गया और आज 2026 में यह हकीकत बन गया। यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी और जटिल व्यापारिक संधि (Comprehensive Deal) है।





