15 जुलाई को तियानजिन में एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक, द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने पर चर्चा की संभावना
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर रविवार से सिंगापुर और चीन के तीन दिवसीय दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस यात्रा के दौरान वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे और भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को लेकर भी अहम बातचीत करेंगे। खास बात यह है कि यह जयशंकर की 2020 के एलएसी गतिरोध के बाद पहली चीन यात्रा होगी।
सिंगापुर में पहला पड़ाव
जयशंकर दौरे की शुरुआत सिंगापुर से करेंगे, जहां रविवार को वे अपने समकक्ष विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय संबंधों और आपसी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे।
चीन में एससीओ बैठक
विदेश मंत्री 15 जुलाई को चीन के तियानजिन शहर में आयोजित एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे। यह बैठक चीनी विदेश मंत्री वांग यी के निमंत्रण पर बुलाई गई है। इसमें एससीओ के सभी सदस्य देशों के विदेश मंत्री और संगठन के स्थायी निकायों के प्रमुख शामिल होंगे।
एलएसी गतिरोध के बाद अहम यात्रा
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल हाल ही में चीन यात्रा कर चुके हैं। ऐसे में जयशंकर की यात्रा को सीमा विवाद के बाद द्विपक्षीय रिश्तों को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक और प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
द्विपक्षीय बातचीत में क्या हो सकता है फोकस?
चीनी विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि भारत-चीन के बीच आपसी संबंधों को सामान्य बनाने, व्यापार और निवेश सहयोग, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल उद्योग में इस्तेमाल होने वाली दुर्लभ धातुओं की आपूर्ति जैसे मुद्दों पर बातचीत की संभावना है।
वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी मंथन
एससीओ बैठक में आतंकवाद, क्षेत्रीय स्थिरता, कनेक्टिविटी, ऊर्जा सहयोग और आर्थिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है। चीन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह बैठक सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने का मंच बनेगी।
जयशंकर की यह यात्रा भारत-चीन रिश्तों में नरमी और बातचीत की बहाली का संकेत हो सकती है, लेकिन दोनों देशों के बीच एलएसी पर बनी संवेदनशीलता और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए आगे की राह सहज नहीं मानी जा रही है।





