Wednesday, February 11, 2026

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एपस्टीन फाइलों में 10 लाख बार आया ट्रंप का नाम: अमेरिकी सांसद जेमी रस्किन का बड़ा दावा; ‘सच्चाई छिपाने’ का लगाया आरोप

वॉशिंगटन: अमेरिकी राजनीति में ‘एपस्टीन फाइल्स’ (Epstein Files) के ताजा खुलासे ने एक नया भूचाल ला दिया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख सांसद जेमी रस्किन (Jamie Raskin) ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि दिवंगत यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के डेटाबेस में वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम 10 लाख से अधिक बार सामने आया है। रस्किन, जो इन गोपनीय दस्तावेजों की समीक्षा करने वाले द्विदलीय संसदीय दल का हिस्सा हैं, ने आरोप लगाया कि ये फाइलें ट्रंप के उन दावों को भी चुनौती देती हैं जिनमें उन्होंने एपस्टीन के साथ अपने संबंधों को बहुत पहले खत्म करने की बात कही थी।

सांसद का दावा: सर्च इंजन में ‘ट्रंप’ के नाम की बाढ़

सांसद जेमी रस्किन ने मीडिया से बातचीत में दस्तावेजों की समीक्षा के दौरान आए परिणामों का विवरण साझा किया:

  • कीवर्ड सर्च: रस्किन के अनुसार, जब उन्होंने न्याय विभाग (DOJ) द्वारा उपलब्ध कराए गए डेटाबेस में ‘Trump’, ‘Donald’ या ‘Don’ जैसे शब्दों को सर्च किया, तो सिस्टम ने 1,000,000 से अधिक परिणाम दिखाए।
  • अस्पष्टता का तर्क: हालांकि, रस्किन ने यह भी स्वीकार किया कि डेटाबेस के “भ्रमित करने वाले और पुराने” होने के कारण यह कहना मुश्किल है कि इनमें से हर उल्लेख सीधे तौर पर राष्ट्रपति ट्रंप के लिए ही है, लेकिन नाम की पुनरावृत्ति असाधारण रूप से अधिक है।
  • मार-ए-लागो कनेक्शन: रस्किन ने एक 2009 के ईमेल का हवाला दिया, जो संकेत देता है कि ट्रंप ने एपस्टीन को अपने मार-ए-लागो क्लब से कभी नहीं निकाला था, जबकि ट्रंप सार्वजनिक रूप से इसके विपरीत दावा करते रहे हैं।

क्या हैं ‘एपस्टीन फाइल्स’ और क्यों मचा है शोर?

ये फाइलें ‘एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट’ के तहत जारी की जा रही हैं, जिसे खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने नवंबर 2025 में हस्ताक्षरित किया था:

  1. 30 लाख पन्नों का डेटा: न्याय विभाग ने अब तक लगभग 30 लाख पन्ने, 1.8 लाख तस्वीरें और 2,000 वीडियो जारी किए हैं।
  2. दिग्गजों के नाम: इन दस्तावेजों में न केवल ट्रंप, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, बिल गेट्स, एलन मस्क और कई अंतरराष्ट्रीय राजनेताओं व अरबपतियों के नाम शामिल हैं।
  3. गंभीर आरोप: फाइलों में यौन शोषण के नेटवर्क, निजी विमानों की ‘लॉग बुक’ और प्रभावशाली लोगों के बीच हुई ईमेल बातचीत का कच्चा चिट्ठा है।

राजनीतिक संग्राम: ‘कवर-अप’ के आरोप

सांसद रस्किन और भारतीय मूल के सांसद रो खन्ना ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं:

  • सीमित पहुंच: सांसदों का आरोप है कि न्याय विभाग उन्हें केवल कुछ घंटों के लिए और बेहद जटिल तरीके से फाइलें देखने दे रहा है, जिसे वे एक प्रकार का ‘कवर-अप’ (मामले को दबाना) मान रहे हैं।
  • अधूरे दस्तावेज: रो खन्ना ने दावा किया कि कई महत्वपूर्ण नामों को अभी भी ‘इनप्रोप्रिएटली रेडैक्ट’ (गलत तरीके से मिटाया) किया गया है, ताकि शक्तिशाली लोगों को बचाया जा सके।

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