ऋषिकेश: तीर्थनगरी ऋषिकेश के उप-निबंधक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय में करोड़ों रुपये के भूमि स्टांप घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भू-माफियाओं और विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से पिछले कई वर्षों से सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा था। इस घोटाले के तहत फर्जी स्टांप पेपरों और कम मूल्य के दस्तावेजों के आधार पर बेशकीमती जमीनों की रजिस्ट्रियां की गईं। शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है और संबंधित फाइलों को सील कर दिया गया है।
कैसे होता था ‘करोड़ों का खेल’?
जांच में यह बात निकलकर आई है कि घोटाले को अंजाम देने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया गया था:
- पुराने स्टांप का खेल: वर्षों पुराने स्टांप पेपरों को नए दस्तावेजों में जोड़कर और उनकी तारीखों में हेरफेर कर सरकार को देय स्टांप शुल्क की चोरी की गई।
- फर्जी बैंक चालान: कई रजिस्ट्रियों में फर्जी बैंक चालान और रसीदों का उपयोग किया गया, जिससे पैसा सरकारी खाते में पहुंचने के बजाय बिचौलियों की जेब में चला गया।
- मिलीभगत: विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा दस्तावेजों की गहनता से जांच न करना या जानबूझकर अनदेखी करना इस घोटाले का मुख्य आधार बना।
एसआईटी (SIT) की रडार पर कई अधिकारी और माफिया
शासन के निर्देश पर देहरादून पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने कार्यालय में छापेमारी कर रिकॉर्ड खंगाले हैं:
- सैकड़ों फाइलें संदिग्ध: पिछले पांच वर्षों में हुई जमीनों की रजिस्ट्रियों की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि 200 से अधिक फाइलें ऐसी मिली हैं जिनमें स्टांप शुल्क का बड़ा अंतर है।
- भू-माफियाओं का जाल: ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों के कई बड़े जमीन कारोबारियों के नाम इस घोटाले में सामने आ रहे हैं, जो फर्जीवाड़े के जरिए महंगी जमीनों को कम कीमत पर रजिस्टर करवा रहे थे।
- रिकॉर्ड की हेराफेरी: कार्यालय के ‘लेजर’ और ऑनलाइन रिकॉर्ड में भी छेड़छाड़ की आशंका जताई गई है, जिसकी फॉरेंसिक जांच की जाएगी।
राजस्व को भारी नुकसान, सरकार सख्त
मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
- निलंबन की तैयारी: घोटाले में संलिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को तुरंत निलंबित करने और उनके खिलाफ धोखाधड़ी (420) का मुकदमा दर्ज करने की तैयारी है।
- वसूली की प्रक्रिया: जिन जमीनों की रजिस्ट्री में स्टांप चोरी हुई है, उनसे न केवल बकाया राशि वसूली जाएगी, बल्कि उन पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।
आम जनता में हड़कंप
इस खुलासे के बाद उन लोगों में हड़कंप मच गया है जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में ऋषिकेश क्षेत्र में जमीनें खरीदी हैं। लोगों को डर है कि कहीं उनके प्लॉट या मकान के दस्तावेज भी इस फर्जीवाड़े की चपेट में न आ जाएं।
“ऋषिकेश उप-निबंधक कार्यालय में वर्षों से चल रहे इस भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं। हमने प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर एसआईटी जांच शुरू कर दी है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।” — जिलाधिकारी, देहरादून





