देहरादून/ऋषिकेश: उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अपने निर्माण के एक और महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर गई है। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने परियोजना के अंतिम खंड के अंतर्गत आने वाले पांच प्रमुख रेलवे स्टेशनों के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। इन पांच स्टेशनों में से एक को एक विशाल टर्मिनल स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा, जो पूरी परियोजना का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस स्टेशन होगा। इस विकास के साथ ही पहाड़ में रेल का सपना हकीकत की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
इन पांच स्टेशनों के लिए खुले टेंडर
रेलवे ने जिन पांच स्टेशनों के निर्माण के लिए तकनीकी बोलियां खोली हैं, उनमें दुर्गम पहाड़ियों के बीच बनने वाले महत्वपूर्ण स्टॉपेज शामिल हैं। ये स्टेशन न केवल स्थानीय लोगों के लिए परिवहन का साधन बनेंगे, बल्कि चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी मील का पत्थर साबित होंगे। टेंडर प्रक्रिया में देश की बड़ी निर्माण कंपनियों ने रुचि दिखाई है, और जल्द ही चयनित कंपनियों को कार्य आवंटित कर दिया जाएगा।
परियोजना का सबसे बड़ा ‘टर्मिनल स्टेशन’
परियोजना के तहत बनने वाला सबसे बड़ा स्टेशन एक आधुनिक टर्मिनल के रूप में तैयार किया जाएगा।
- अत्याधुनिक सुविधाएं: इस टर्मिनल स्टेशन पर यात्रियों के लिए विश्वस्तरीय वेटिंग लाउंज, फूड कोर्ट, पार्किंग और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी की सुविधा होगी।
- रणनीतिक महत्व: यह स्टेशन न केवल रेल संचालन का मुख्य केंद्र होगा, बल्कि यहां से भारी मात्रा में माल ढुलाई और लॉजिस्टिक प्रबंधन की भी व्यवस्था होगी।
- पहाड़ी वास्तुकला: स्टेशन की इमारत का डिजाइन उत्तराखंड की पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक शैली का मिश्रण होगा।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन: एक नजर में
यह परियोजना सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण रेल परियोजनाओं में से एक है:
- कुल लंबाई: यह रेल लाइन लगभग 125 किलोमीटर लंबी है।
- सुरंगों का जाल: इस मार्ग का लगभग 85% हिस्सा सुरंगों (Tunnels) से होकर गुजरेगा, ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो।
- कनेक्टिविटी: यह रेल लाइन ऋषिकेश को सीधे कर्णप्रयाग से जोड़ेगी, जिससे यात्रा का समय वर्तमान सड़क मार्ग की तुलना में आधा रह जाएगा।
विकास और पर्यावरण का संतुलन
रेल विकास निगम के अधिकारियों के अनुसार, स्टेशनों के निर्माण के दौरान हिमालय की संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। स्टेशन के बुनियादी ढांचे को भूकंपरोधी तकनीक से बनाया जाएगा। इन स्टेशनों के निर्माण से न केवल गढ़वाल क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
कब तक पूरा होगा काम?
प्रशासन का लक्ष्य है कि वर्ष 2025-26 तक इस पूरी रेल लाइन पर ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाए। टेंडर खुलने के बाद अब स्टेशनों के सिविल कंस्ट्रक्शन के काम में तेजी आएगी। टनल निर्माण का अधिकांश कार्य पहले ही निर्णायक दौर में पहुँच चुका है।





