नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ संबंधी बयानों के बीच भारत ने कूटनीति को नए सिरे से रीसेट करने की रणनीति अपनाई है। इसी कड़ी में चीन के विदेश मंत्री आगामी दिनों में दिल्ली का दौरा करेंगे। यह दौरा न केवल भारत-चीन संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है, बल्कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में दक्षिण एशिया की कूटनीति को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का प्रस्तावित टैरिफ भारत पर दबाव बनाने का प्रयास है, लेकिन मौजूदा हालात में यह “बम फुस्स” साबित होगा। भारत ने बहुपक्षीय मंचों पर अपने संबंधों को मजबूत करते हुए अमेरिका, यूरोप और एशिया में संतुलित साझेदारी की नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
चीन के विदेश मंत्री की दिल्ली यात्रा इसी कूटनीतिक समीकरण का हिस्सा मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच सीमा विवाद से लेकर व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग तक कई मुद्दों पर बातचीत होगी। इसके साथ ही वैश्विक व्यापार युद्ध के असर को कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए साझा रणनीति पर भी चर्चा की उम्मीद है।
रणनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि भारत अब एक “प्रतिक्रियाशील कूटनीति” से आगे बढ़कर “प्रोएक्टिव डिप्लोमेसी” की ओर कदम बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य है—अमेरिका-चीन टकराव के बीच अपने आर्थिक और सुरक्षा हितों को सुरक्षित रखते हुए वैश्विक शक्ति समीकरण में अपनी भूमिका को और मजबूत करना।





