Saturday, February 14, 2026

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उत्तराखंड: 49 साल में 447 बार हिली धरती, अधिकतर झटके तीन से चार तीव्रता वाले

देहरादून। हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है और उत्तराखंड इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। पिछले 49 वर्षों में राज्य में 447 बार धरती कांपी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें से अधिकांश झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर तीन से चार के बीच दर्ज की गई। हालांकि बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले भूकंप कम आए, लेकिन छोटे-छोटे झटकों ने लगातार यह संकेत दिया कि क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से बेहद सक्रिय है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1975 से 2024 के बीच उत्तराखंड में औसतन हर साल नौ बार भूकंप दर्ज किए गए। इनमें से 300 से अधिक भूकंपों की तीव्रता मध्यम श्रेणी (3-4) की रही। जबकि कुछ बार पांच से छह तीव्रता वाले झटके भी महसूस किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे छोटे झटके भले ही तत्कालिक नुकसान न पहुंचाएं, लेकिन ये बड़े खतरे की चेतावनी के रूप में देखे जाने चाहिए।
भूकंप विज्ञानियों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक संरचना और टेक्टॉनिक प्लेटों की हलचल इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है। उत्तराखंड विशेष रूप से भूकंपीय जोन-4 और जोन-5 में आता है, जिन्हें देश के सबसे संवेदनशील जोन माना जाता है। इसी वजह से यहां भविष्य में बड़े भूकंप की आशंका को नकारा नहीं जा सकता।
राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग समय-समय पर जनजागरूकता कार्यक्रम चलाते रहे हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि भवन निर्माण में भूकंपरोधी तकनीकों का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाए। इसके अलावा लोगों को आपातकालीन तैयारी, बचाव तकनीक और सुरक्षित स्थानों के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए।
गौरतलब है कि 1991 में उत्तरकाशी और 1999 में चमोली में आए भूकंपों ने भारी तबाही मचाई थी। इन घटनाओं से सबक लेते हुए आपदा प्रबंधन व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों को भी भूकंप से बचाव की दिशा में सतर्क रहना होगा।

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