देहरादून: उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में कार्यरत हजारों प्राथमिक शिक्षकों के लिए एक बड़ी खबर है। राज्य के शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों ने पूर्व में दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से अपना प्रशिक्षण पूरा किया था, उन्हें अब अपनी शैक्षणिक योग्यता को पुख्ता करने के लिए एक बार फिर पढ़ाई की राह पर लौटना होगा। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) इन शिक्षकों के लिए विशेष कक्षाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करेगा।
क्या है पूरा मामला?
यह निर्णय राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के मानकों और कोर्ट के विभिन्न आदेशों के अनुपालन में लिया गया है। दरअसल, उत्तराखंड के प्राथमिक विद्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक तैनात हैं जिन्होंने एनआईओएस (NIOS) के माध्यम से डीएलएड (D.El.Ed) या अन्य ब्रिज कोर्स किए थे। केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, इन शिक्षकों की डिग्री की वैधता और प्रशिक्षण की गुणवत्ता को लेकर कुछ तकनीकी पेच फंसे हुए थे, जिसे दूर करने के लिए पुन: प्रशिक्षण या अतिरिक्त मॉड्यूल को अनिवार्य किया जा रहा है।
NIOS की भूमिका और प्रशिक्षण का स्वरूप
- विशेष सत्रों का आयोजन: NIOS द्वारा इन शिक्षकों के लिए विशेष अध्ययन केंद्र बनाए जाएंगे, जहाँ उन्हें आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से रूबरू कराया जाएगा।
- ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड: जानकारी के अनुसार, कक्षाएं हाइब्रिड मोड में हो सकती हैं ताकि शिक्षकों के नियमित स्कूल कार्य पर अधिक प्रभाव न पड़े।
- दस्तावेजों का सत्यापन: इस प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों के पुराने प्रमाणपत्रों का पुन: सत्यापन भी किया जाएगा।
शिक्षकों पर इसका प्रभाव
शिक्षा विभाग के इस कदम से उन शिक्षकों में खलबली है जो लंबे समय से सेवा में हैं। हालांकि, विभाग का तर्क है कि यह प्रक्रिया शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और भविष्य में आने वाली किसी भी कानूनी अड़चन से बचने के लिए आवश्यक है। यदि शिक्षक इस निर्धारित अवधि में अपनी पढ़ाई या प्रशिक्षण पूरा नहीं करते हैं, तो उनकी पदोन्नति (Promotion) और वेतन वृद्धि पर भी असर पड़ सकता है।
विभाग की तैयारी
उत्तराखंड शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करें जिन्होंने एनआईओएस से कोर्स किया है। जल्द ही इन शिक्षकों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
मुख्य बिंदु: इस अभियान का उद्देश्य राज्य की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता लाना और शिक्षकों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करना है।




