देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य में सौर ऊर्जा के उत्पादन को प्रोत्साहित करने और घरेलू उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। प्रदेश में अब सोलर पैनलों के माध्यम से उत्पादित अतिरिक्त (सरप्लस) बिजली को दो रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदा जाएगा। यह नई व्यवस्था और संशोधित दरें 20 अगस्त 2025 से पूरे राज्य में प्रभावी हो गई हैं। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) के निर्देशों के बाद ऊर्जा विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ‘नेट मीटरिंग’ प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं को उनकी बचत का उचित मूल्य देना और राज्य को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
क्या है नई नीति? सरप्लस बिजली का गणित
इस नई नीति के तहत सौर ऊर्जा स्थापित करने वाले उपभोक्ताओं के लिए भुगतान की प्रक्रिया को सरल और लाभकारी बनाया गया है:
- नेट मीटरिंग का लाभ: यदि किसी उपभोक्ता के घर या संस्थान में लगा सोलर प्लांट उसकी खपत से अधिक बिजली पैदा करता है, तो वह अतिरिक्त बिजली स्वतः ही सरकारी ग्रिड में चली जाएगी।
- भुगतान की दर: ग्रिड को दी गई इस अतिरिक्त बिजली के लिए अब यूपीसीएल (UPCL) उपभोक्ता को ₹2.00 प्रति यूनिट की दर से क्रेडिट देगा।
- बिल में समायोजन: यह राशि उपभोक्ता के मासिक बिजली बिल में समायोजित (Adjust) की जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं का बिजली बिल या तो शून्य हो जाएगा या उन्हें सरकार से भुगतान प्राप्त होगा।
20 अगस्त 2025: कट-ऑफ तारीख का महत्व
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई दरों का लाभ एक निश्चित समय सीमा के अनुसार मिलेगा:
- प्रभावी तिथि: जो भी नए सोलर कनेक्शन 20 अगस्त 2025 के बाद स्थापित हुए हैं या जिन्होंने इस तारीख के बाद ग्रिड को बिजली देना शुरू किया है, उन पर यह ₹2 की दर लागू होगी।
- पुराने उपभोक्ता: इससे पहले के अनुबंधों (Agreements) के तहत स्थापित सोलर प्लांटों पर उनकी तत्कालीन शर्तों के अनुसार ही भुगतान किया जाएगा।
- पारदर्शिता: बिजली बिलों में अब स्पष्ट रूप से ‘सरप्लस एक्सपोर्ट’ और ‘इंपोर्ट’ की इकाइयों का विवरण दिया जाएगा ताकि उपभोक्ता अपनी कमाई का हिसाब रख सकें।
पलायन रोकने और स्वरोजगार में मिलेगी मदद
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप, यह नीति ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो सकती है:
- बंजर भूमि का उपयोग: पहाड़ों में खाली पड़ी बंजर भूमि पर छोटे सोलर फार्म लगाकर ग्रामीण युवा हर महीने एक निश्चित आय सुनिश्चित कर सकते हैं।
- पहाड़ी क्षेत्रों को प्राथमिकता: सरकार विशेष रूप से सीमांत जिलों में सोलर रूफटॉप योजना को तेजी से विस्तार दे रही है ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में बिजली की कटौती की समस्या खत्म हो सके।
- पर्यावरण संरक्षण: कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में यह ₹2 प्रति यूनिट की आकर्षक दर एक बड़े उत्प्रेरक (Catalyst) का काम करेगी।





