Thursday, February 26, 2026

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उत्तराखंड में राशन कार्ड प्रणाली का ‘डिजिटल कायाकल्प’: 24 लाख कार्ड केंद्रीयकृत पोर्टल पर होंगे शिफ्ट; 10 दिनों तक बंद रहेंगी ऑनलाइन सेवाएं

देहरादून: उत्तराखंड के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने राशन कार्ड वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और हाईटेक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के लगभग 24 लाख राशन कार्डों को अब राज्य के स्थानीय सर्वर से हटाकर केंद्र सरकार के केंद्रीयकृत पोर्टल (Centralized Portal) पर शिफ्ट किया जा रहा है। इस महा-अभियान के चलते डेटा माइग्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए विभाग ने अगले 10 दिनों तक राशन कार्ड से जुड़ी सभी ऑनलाइन सेवाओं को बंद रखने का निर्णय लिया है। इस बदलाव के बाद ‘वन नेशन-वन राशन कार्ड’ योजना को और अधिक मजबूती मिलेगी।

पोर्टल शिफ्टिंग का मुख्य उद्देश्य

डेटा को केंद्रीय सर्वर पर स्थानांतरित करने के पीछे सरकार के कई महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं:

  • पारदर्शिता और शुद्धता: केंद्रीय पोर्टल पर शिफ्ट होने से अपात्र राशन कार्ड धारकों की पहचान करना आसान हो जाएगा और डेटा में होने वाली गड़बड़ियों को रोका जा सकेगा।
  • अतंरराज्यीय पोर्टेबिलिटी: इस बदलाव के बाद उत्तराखंड के राशन कार्ड धारक देश के किसी भी राज्य में जाकर अपनी पात्रता के अनुसार राशन ले सकेंगे।
  • नकली कार्ड पर लगाम: आधार सीडिंग और केंद्रीय डेटाबेस से मिलान होने के कारण एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग राज्यों या जिलों में राशन कार्ड होना असंभव हो जाएगा।

10 दिनों तक कौन सी सेवाएं रहेंगी प्रभावित?

डेटा माइग्रेशन की प्रक्रिया के दौरान आम जनता को कुछ समय के लिए असुविधा का सामना करना पड़ सकता है:

  1. नया पंजीकरण बंद: अगले 10 दिनों तक नए राशन कार्ड के लिए आवेदन नहीं किए जा सकेंगे।
  2. संशोधन पर रोक: राशन कार्ड में नाम जुड़वाने, हटवाने या पते में बदलाव जैसी ऑनलाइन सेवाएं पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होंगी।
  3. ऑनलाइन स्टेटस: कार्ड धारक अपनी पात्रता या यूनिट का स्टेटस ऑनलाइन चेक नहीं कर पाएंगे।

राशन वितरण पर क्या होगा असर?

विभाग ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल शिफ्टिंग का असर राशन की दुकानों से मिलने वाले खाद्यान्न पर नहीं पड़ेगा:

  • मैनुअल वितरण की व्यवस्था: जिन क्षेत्रों में ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में दिक्कत आएगी, वहां विभाग वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से राशन वितरण सुनिश्चित करेगा ताकि गरीबों को परेशानी न हो।
  • राशन डीलरों को निर्देश: सभी सस्ता गल्ला विक्रेताओं को सूचित कर दिया गया है कि वे सर्वर डाउन रहने की स्थिति में रजिस्टर के माध्यम से रिकॉर्ड बनाए रखें।

विभागीय अधिकारियों का पक्ष

खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह एक तकनीकी अनिवार्य प्रक्रिया है जो भविष्य में उपभोक्ताओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी।

“हम प्रदेश के सभी 24 लाख राशन कार्डों को नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के केंद्रीय सर्वर पर माइग्रेट कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में डेटा की सुरक्षा और सटीकता का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। 10 दिनों के भीतर सेवाएं पुनः सुचारू रूप से शुरू कर दी जाएंगी।” — खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, उत्तराखंड

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