Friday, January 16, 2026

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उत्तराखंड में भूमि विवादों के निपटारे के लिए ‘मिशन मोड’ में सरकार: लंबित 50 हजार मुकदमों के लिए चलेगा विशेष अभियान; राजस्व अदालतों को डेडलाइन तय

देहरादून: उत्तराखंड में जमीन से जुड़े विवादों और राजस्व अदालतों में सालों से लंबित मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। शासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न राजस्व न्यायालयों (तहसीलदार से लेकर कमिश्नर कोर्ट तक) में 50 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिनके कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस स्थिति पर संज्ञान लेते हुए एक ‘विशेष अभियान’ चलाने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान के तहत पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

लंबित मामलों का भारी बोझ: क्यों लगा मुकदमों का अंबार?

राजस्व विभाग के विश्लेषण में सामने आया है कि मुकदमों के लंबित होने के पीछे कई मुख्य कारण हैं:

  • तारीख पर तारीख: कई मामले ऐसे हैं जो पिछले 10 से 15 वर्षों से चल रहे हैं, लेकिन गवाहों की अनुपस्थिति या फाइलों के रखरखाव में कमी के कारण उन पर फैसला नहीं हो पा रहा है।
  • अधिकारियों की व्यस्तता: उपजिलाधिकारी (SDM) और तहसीलदार स्तर के अधिकारियों के पास प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारियां अधिक होने के कारण वे न्यायिक कार्यों के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते।
  • अभिलेखों का डिजिटलीकरण न होना: पुराने भू-अभिलेखों के स्पष्ट न होने के कारण भी विवाद सुलझने में देरी होती है।

विशेष अभियान की मुख्य रणनीतियां

सरकार ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है:

  1. डे-टू-डे सुनवाई: विशेष रूप से उन मामलों के लिए रोजाना सुनवाई (Day-to-Day Hearing) का प्रावधान किया जाएगा जो 5 साल से अधिक पुराने हैं।
  2. कैंप कोर्ट का आयोजन: दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को जिला मुख्यालय न दौड़ना पड़े, इसके लिए गांवों और तहसीलों में ‘कैंप कोर्ट’ लगाकर मौके पर ही विवादों का समाधान किया जाएगा।
  3. ऑनलाइन मॉनिटरिंग: मुख्य सचिव और राजस्व परिषद के स्तर पर हर जिले में निपटाए गए मुकदमों की साप्ताहिक रिपोर्ट ली जाएगी। इसके लिए ‘राजस्व वाद निगरानी प्रणाली’ (RCCMS) पोर्टल को और अधिक सशक्त बनाया गया है।

आम जनता को क्या होगा फायदा?

इस अभियान के सफल क्रियान्वयन से उत्तराखंड के नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी:

  • समय और धन की बचत: अदालतों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी और वकीलों व यात्रा पर होने वाला अनावश्यक खर्च कम होगा।
  • निवेश और विकास: भूमि विवाद सुलझने से रुकी हुई विकास योजनाएं और निजी निवेश के रास्ते खुलेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा।
  • सामाजिक शांति: गांवों में होने वाले आपसी विवादों और रंजिशों में कमी आएगी, जो अक्सर भूमि संबंधी मामलों के कारण उत्पन्न होती हैं।

निष्कर्ष: सुशासन की ओर एक और कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान न केवल न्यायिक बोझ कम करेगा बल्कि प्रशासन के प्रति जनता के विश्वास को भी बहाल करेगा। हालांकि, चुनौती यह सुनिश्चित करने की होगी कि जल्दबाजी में किए गए फैसलों में न्याय की गुणवत्ता से समझौता न हो। सरकार का लक्ष्य है कि इस अभियान के माध्यम से आगामी छह महीनों के भीतर लंबित मामलों की संख्या को आधा किया जा सके।

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