पिथौरागढ़ (उत्तराखंड), 21 मार्च 2026: उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में मौसम के बदले मिजाज ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। गुरुवार रात से शुरू होकर, जिला मुख्यालय सहित सभी तहसीलों में भारी गर्जना और तूफान के साथ वर्षा का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। इस बीच, उच्च और मध्य हिमालयी चोटियों पर लगातार तीसरे दिन भी भारी हिमपात हुआ है, जिससे जनजीवन ठहर सा गया है।
बर्फ की चादर: उच्च और मध्य हिमालयी क्षेत्र
पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी चोटियों और घाटियों ने बर्फ की मोटी सफेद चादर ओढ़ ली है। नंदा देवी से लेकर लिपुलेख, ओम पर्वत और धारचूला की व्यास व चौदास घाटी के चोटियां पूरी तरह हिमाच्छादित हो चुकी हैं। मध्य हिमालयी चोटियां भी इस हिमपात से अछूती नहीं रही हैं और उन पर भी बर्फ की मोटी परत जम गई है।
- बर्फबारी का असर: लगातार बर्फबारी ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों को पूरी तरह अलग-थलग कर दिया है। न केवल चोटियां, बल्कि कई घाटियां भी बर्फ की मोटी परत से ढक गई हैं, जिससे आवाजाही और दैनिक कार्यों में भारी कठिनाई हो रही है।
तापमान में गिरावट: बाजार और सड़कों पर सन्नाटा
वर्षा और हिमपात के कारण पिथौरागढ़ जनपद के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस कड़ाके की ठंड का असर जिला मुख्यालय और अन्य तहसीलों के बाजारों व सड़कों पर साफ नजर आने लगा है। बाजारों में रौनक कम हो गई है और सड़कों पर आवाजाही नाममात्र की रह गई है। लोग ठंड से बचने के लिए घरों में रहने को मजबूर हैं।
धारचूला और लिपुलेख में भारी हिमपात: मार्ग बंद होने की आशंका
धारचूला की व्यास और चौदास घाटी की चोटियों पर बर्फबारी शुक्रवार दोपहर तक जारी रही। रिपोर्ट के अनुसार, लिपुलेख में तीन फीट, नावीढांग में ढाई फीट, गुंजी, नाबी, नपलच्यु, छियालेख में दो फीट और कुटी में तीन फीट तक हिमपात हो चुका है। ज्योलिंगकोंग क्षेत्र में तो बर्फबारी तीन से चार फीट तक दर्ज की गई है।
- मार्गों की स्थिति: भारी हिमपात के कारण उच्च हिमालयी क्षेत्रों को जोड़ने वाले कई मार्ग बंद हो गए हैं या बंद होने की कगार पर हैं। प्रशासन मार्गों को खोलने और बिजली-पानी जैसी आवश्यक सेवाओं को सुचारू रखने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहा है, लेकिन लगातार बर्फबारी के कारण यह कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
प्रशासन की तैयारी: बचाव और राहत कार्यों पर जोर
जिला प्रशासन ने भारी हिमपात और कड़ाके की ठंड के मद्देनजर बचाव और राहत कार्यों पर जोर दिया है। सड़कों को खोलने, आवश्यक सेवाओं को बहाल करने और प्रभावित लोगों को सहायता पहुंचाने के लिए टीमों को तैनात किया गया है। लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है।
कुल मिलाकर, पिथौरागढ़ जनपद में भारी हिमपात और कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। प्रशासन और स्थानीय लोग इस प्राकृतिक आपदा का सामना करने के लिए एकजुट होकर काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार बर्फबारी के कारण स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।





