हल्द्वानी।
पिथौरागढ़ की मासूम लाडली के लिए न्याय की मांग को लेकर शुक्रवार को हल्द्वानी के बुद्धपार्क में विशाल जनसभा हुई। भीड़ में शामिल हर आंख नम थी और हर गला न्याय की मांग कर रहा था। लाडली के ताऊ के शब्द – “हमारी बच्ची पिथौरागढ़ से चलकर हंसी-खुशी हल्द्वानी आई थी, आपने हमें उसकी लाश दी। उसके शरीर पर सिगरेट से दागे गए निशान आज भी हमारे दिल को जला देते हैं” – ने सभा में मौजूद हजारों लोगों को रुला दिया। इसके बाद पूरा मैदान गूंज उठा – “बेटी हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं।”
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सवाल सरकार से – “क्या उत्तराखंड में काबिल वकील नहीं?”
लाडली के ताऊ ने सरकार पर तीखे सवाल दागे। उन्होंने कहा कि बेटी की हत्या के बाद पूरा कुमाऊं उठ खड़ा हुआ था और तत्कालीन सरकार को झुकना पड़ा था। हरीश रावत ने मदद के तौर पर तीन लाख का चेक भेजा था जिसे परिवार ने ठुकरा दिया। उन्होंने कहा, “क्या उत्तराखंड में कोई काबिल वकील नहीं हैं, जो हमें मध्यप्रदेश से वकील बुलाने पड़े? राज्य में सरकारी वकीलों की नियुक्ति परीक्षा से होनी चाहिए ताकि सेटिंग-गेटिंग से नेता की पत्नी और बच्चे वकील न बनें। जब तक ऐसा नहीं होगा, आरोपी बचते रहेंगे।”
उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी पर आरोप लगाया कि आंदोलन तोड़ने की कोशिश की जा रही है। यहां तक कहा कि “अगर भाजपा का कोई नेता हत्यारा नहीं है तो बेटी के समर्थन में क्यों नहीं आया? आखिर आज एक सत्तारूढ़ विधायक खामोश क्यों हैं?”
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पुलिस से झड़प, महिलाएं सड़क पर बैठीं
सभा के दौरान भीड़ ने पुलिस पर दबाव बनाते हुए जुलूस निकालने की कोशिश की। पुलिस ने गेट बंद कर रोकने की कोशिश की तो लोग भड़क गए। इसी दौरान पहाड़ी आर्मी के संयोजक हरीश रावत गेट फांदकर बाहर आ गए। मजबूरन पुलिस को गेट खोलना पड़ा। इस दौरान धक्का-मुक्की हुई और महिलाएं सड़क पर धरने पर बैठ गईं।
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समर्थन में पहुंचे कांग्रेसी नेता
सभा में लोगों ने कांग्रेस और भाजपा दोनों पर उपेक्षा का आरोप लगाया। हालांकि जब जुलूस सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर बढ़ा तो कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश और ललित जोशी समर्थन देने पहुंचे। सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
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यह था पूरा मामला
नवंबर 2014 में पिथौरागढ़ की छह वर्षीय लाडली परिवार संग हल्द्वानी के शीशमहल क्षेत्र में विवाह समारोह में आई थी। समारोह से अचानक लापता होने के बाद छह दिन तक उसकी तलाश चली और अंततः उसका शव गौला नदी से बरामद हुआ। जांच में सामने आया कि मासूम को टॉफी का लालच देकर अगवा किया गया और फिर सामूहिक दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई।
आठ दिन बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी अख्तर अली को चंडीगढ़ से पकड़ा, जिसकी निशानदेही पर प्रेमपाल और जूनियर मसीह गिरफ्तार हुए। मार्च 2016 में हल्द्वानी की एडीजे स्पेशल कोर्ट ने अख्तर अली को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। प्रेमपाल को पांच साल की सजा हुई। लेकिन छह दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में अख्तर अली को बरी कर दिया। इसी फैसले के बाद कुमाऊं फिर उबाल पर है।
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लाडली के साथ अंकिता और योगा ट्रेनर को भी न्याय दो
सभा में शामिल लोग सिर्फ लाडली ही नहीं, बल्कि अंकिता भंडारी और हल्द्वानी की योगा ट्रेनर को भी न्याय दिलाने की मांग कर रहे थे। हाथों में “रिव्यू पिटीशन दायर करो”, “महिला उत्पीड़न बंद करो” जैसे पोस्टर लिए लोग नारे लगा रहे थे।
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जनसभा में गूंजे स्वर
• “जिसे हाईकोर्ट ने फांसी सुनाई, उसे सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया। आरोपी को फांसी की सजा से कम मंजूर नहीं।” – गोविंद दिगारी, लोकगायक
• “हम हार नहीं मानेंगे। दिल्ली तक जाना पड़ा तो जाएंगे।” – श्वेता माहरा, लोक कलाकार
• “जिस बच्ची के साथ अन्याय हुआ, उसे न्याय मिलना ही चाहिए।” – इंदर आर्या, लोकगायक
• “लाडली की हत्या पर हम अब भी शर्मिंदा हैं, आरोपी को फांसी होनी चाहिए।” – राकेश कनवाल, लोकगायक
• “अगर आरोपी यूं ही छूटते रहे तो न्यायपालिका से विश्वास उठ जाएगा।” – राकेश जोशी, लोकगायक
• “लाडली पूरे कुमाऊं की बेटी थी, उसे जल्द न्याय मिलना चाहिए।” – पवन पहाड़ी, लोक कलाकार
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इस जनसभा ने साफ कर दिया कि लाडली सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे कुमाऊं की बेटी थी और उसे न्याय दिलाने की लड़ाई अब एक जनांदोलन का रूप ले चुकी है।
उत्तराखंड में न्याय की पुकार : “हमारी बच्ची हंसी-खुशी आई थी… आपने हमें उसकी लाश दी” – जनसभा में छलका ताऊ का दर्द





