Saturday, February 7, 2026

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उत्तराखंड में नागरिकता नियमों पर सख्ती: भारतीय नागरिक होने का दावा करने वाले नेपाली मूल के लोगों को अब दिखाना होगा ‘प्रमाणपत्र’; सरकार ने जारी किए कड़े निर्देश

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य की सुरक्षा और जनसांख्यिकीय रिकॉर्ड की शुद्धता को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। प्रदेश में रह रहे नेपाली मूल के ऐसे लोग जो स्वयं को भारतीय नागरिक बताते हैं, उन्हें अब अपनी नागरिकता की पुष्टि के लिए आधिकारिक ‘नागरिकता प्रमाणपत्र’ (Citizenship Certificate) प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। शासन की ओर से सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस कदम का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करना और सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को रोकना है।

नए आदेश की आवश्यकता क्यों पड़ी?

राज्य सरकार के पास लंबे समय से ऐसी शिकायतें आ रही थीं कि नेपाल से सटी सीमाओं के माध्यम से कई लोग राज्य में प्रवेश कर रहे हैं और बिना वैध दस्तावेजों के स्थानीय निवासी होने का दावा कर रहे हैं:

  • दस्तावेजों का सत्यापन: अब तक कई मामलों में केवल वोटर आईडी या राशन कार्ड को नागरिकता का आधार मान लिया जाता था, लेकिन नए निर्देशों के अनुसार ये दस्तावेज नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माने जाएंगे।
  • सुरक्षा चिंताएं: उत्तराखंड की सीमाएं नेपाल और चीन से सटी हुई हैं। ऐसे में ‘फर्जी पहचान’ के आधार पर बसने वाले लोगों से राज्य की सुरक्षा को खतरा पैदा होने की आशंका जताई गई थी।

क्या हैं नए नियम? मुख्य बातें

शासन द्वारा जारी किए गए आदेश के तहत निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया है:

  1. स्पष्ट प्रमाण की मांग: यदि नेपाली मूल का कोई व्यक्ति सरकारी सुविधाओं, भूमि खरीद या पासपोर्ट के लिए आवेदन करता है और स्वयं को भारतीय नागरिक बताता है, तो संबंधित विभाग को उससे ‘नागरिकता प्रमाणपत्र’ की मांग करनी होगी।
  2. स्थानीय स्तर पर जांच: जिला प्रशासन और खुफिया विभाग (LIU) को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे दावों की गहराई से जांच करें कि व्यक्ति का परिवार कब से भारत में रह रहा है।
  3. नेपाली नागरिकों के लिए प्रावधान: जो लोग विशुद्ध रूप से नेपाली नागरिक हैं और भारत-नेपाल शांति व मैत्री संधि (1950) के तहत यहाँ रह रहे हैं, उन्हें विदेशी नागरिक के रूप में ही पंजीकृत किया जाएगा और वे भारतीय नागरिकता के लाभ नहीं उठा सकेंगे।

विवाद और स्पष्टीकरण

इस आदेश को लेकर सीमावर्ती क्षेत्रों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि:

  • यह आदेश उन लोगों के खिलाफ नहीं है जो कानूनी रूप से भारतीय नागरिक बन चुके हैं या जिनके पास वैध दस्तावेज हैं।
  • इसका मुख्य लक्ष्य अवैध घुसपैठ और पहचान के संकट को समाप्त करना है।
  • जांच प्रक्रिया के दौरान किसी भी व्यक्ति का उत्पीड़न नहीं किया जाएगा, लेकिन संदिग्ध मामलों में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

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