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उत्तराखंड में डिजिटल जनगणना का शंखनाद: कल से शुरू होगी ‘स्वगणना’; बंद मकानों का भी दर्ज होगा ब्योरा

देहरादून। उत्तराखंड में राष्ट्रीय जनगणना 2026 के प्रथम चरण का औपचारिक आगाज शुक्रवार, 10 अप्रैल से होने जा रहा है। प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) राजभवन से ‘स्वगणना’ (Self-Enumeration) प्रक्रिया की शुरुआत कर प्रदेशवासियों को इस महाभियान से जुड़ने का संदेश देंगे। जनगणना निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि इस बार तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है, और पहाड़ों में पलायन के कारण बंद पड़े मकानों की भी गणना सूची में एंट्री की जाएगी ताकि वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन हो सके।

30 हजार से अधिक कर्मियों की ‘फौज’ संभालेगी मोर्चा

राज्य में मकान सूचीकरण और गणना के इस विशाल कार्य को संपन्न करने के लिए शासन ने जनशक्ति का व्यापक इंतजाम किया है।

  • मजबूत टीम: इस अभियान के सफल संचालन के लिए कुल 30,839 कर्मियों की तैनाती की गई है। इसमें 26,348 प्रगणक (Enumerators) और 4,491 सुपरवाइजर शामिल हैं, जो प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक डेटा एकत्र करेंगे।
  • पलायन का आकलन: जनगणना निदेशालय के अनुसार, पहाड़ों में जो मकान बंद मिलेंगे, उनकी भी ‘बंद मकान’ (Locked House) के रूप में एंट्री की जाएगी। इससे राज्य में भवनों की कुल संख्या और पलायन की स्थिति का एक स्पष्ट डेटा तैयार हो सकेगा।

10 अप्रैल से डिजिटल मौका: स्वयं भरें अपना ब्योरा

सचिव जनगणना दीपक कुमार और निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने प्रेसवार्ता में बताया कि जनता की सुविधा के लिए इस बार ‘सेल्फ-इन्यूमरेशन’ का विकल्प दिया गया है।

  • ऑनलाइन पोर्टल: नागरिक 10 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच आधिकारिक पोर्टल (se.census.gov.in) पर जाकर अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं।
  • 15 दिनों का समय: घर-घर सर्वे शुरू होने से ठीक 15 दिन पहले यह पोर्टल खोला जा रहा है। जो लोग डिजिटल रूप से अपनी गणना पूर्ण कर लेंगे, उन्हें प्रगणकों के आने पर केवल अपना रेफरेंस नंबर दिखाना होगा।

25 अप्रैल से शुरू होगा डोर-टू-डोर अभियान

डिजिटल स्वगणना के पश्चात जनगणना का जमीनी कार्य शुरू होगा।

  • समय सीमा: 25 अप्रैल से 24 मई के बीच प्रगणकों की टीमें घर-घर जाकर मकानों का सूचीकरण करेंगी। इस दौरान मकान की बनावट, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल पूछे जाएंगे।
  • सटीकता पर जोर: अधिकारियों ने अपील की है कि नागरिक प्रगणकों को सही जानकारी प्रदान करें, क्योंकि यह डेटा भविष्य की सरकारी योजनाओं और संसाधनों के आवंटन का आधार बनता है।

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