Monday, January 12, 2026

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उत्तराखंड में ‘डिजिटल राजस्व’ युग की शुरुआत: अब घर बैठे मिलेगी जमीन की खतौनी; सीएम धामी ने लॉन्च किए 6 नए वेब पोर्टल

देहरादून/राज्य ब्यूरो: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए छह नए वेब पोर्टल का उद्घाटन किया। इन पोर्टल्स के शुरू होने से अब राज्य के नागरिकों को जमीन की सत्यापित खतौनी और राजस्व संबंधी अन्य दस्तावेजों के लिए सरकारी दफ्तरों और पटवारी चौकियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री ने इसे ‘भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड’ और ‘ई-गवर्नेंस’ की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है।

प्रमुख सेवाएं: अब एक क्लिक पर उपलब्ध

मुख्यमंत्री द्वारा लॉन्च किए गए इन छह पोर्टल्स के माध्यम से राजस्व विभाग की अधिकांश सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है। मुख्य आकर्षण निम्नलिखित हैं:

  • सत्यापित खतौनी: अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोग अपनी जमीन की डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित (Digitally Signed) खतौनी घर बैठे डाउनलोड कर सकेंगे, जो कानूनी रूप से हर जगह मान्य होगी।
  • दाखिल-खारिज (Mutation): जमीन की खरीद-फरोख्त के बाद नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को अब ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी।
  • भू-लेख सुधार: यदि खतौनी या राजस्व रिकॉर्ड में कोई त्रुटि है, तो नागरिक ऑनलाइन सुधार के लिए आवेदन कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री का संबोधन: ‘सुशासन का संकल्प’

पोर्टल की शुरुआत करते हुए सीएम धामी ने कहा कि तकनीक के उपयोग से न केवल आम जनता का समय और पैसा बचेगा, बल्कि विभाग में पारदर्शिता भी आएगी।

“हमारा लक्ष्य है कि जनता को छोटी-छोटी सेवाओं के लिए तहसील और जिला मुख्यालयों तक न दौड़ना पड़े। ये छह पोर्टल सीधे तौर पर ‘सरलीकरण, समाधान और निस्तारण’ के हमारे मंत्र को चरितार्थ करते हैं। अब सिस्टम में कोई भी गड़बड़ी संभव नहीं होगी और जवाबदेही तय की जाएगी।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

राजस्व विभाग के 6 नए डिजिटल स्तंभ

इन पोर्टल्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इनका उपयोग मोबाइल फोन से भी आसानी से किया जा सके:

  1. ई-खतौनी पोर्टल: प्रमाणित रिकॉर्ड प्राप्त करने के लिए।
  2. भू-नक्शा पोर्टल: जमीन की पैमाइश और सीमाओं की सटीक डिजिटल जानकारी के लिए।
  3. राजस्व वाद प्रबंधन प्रणाली: अदालती मामलों की स्थिति जानने के लिए।
  4. स्वामित्व योजना पोर्टल: ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के अधिकार अभिलेखों के लिए।
  5. दाखिल-खारिज निगरानी प्रणाली: आवेदन की प्रगति जानने के लिए।
  6. अतिक्रमण शिकायत पोर्टल: सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की सूचना देने के लिए।

आम जनता को मिलने वाले लाभ

  • समय की बचत: तहसील के चक्कर लगाने की जरूरत खत्म।
  • भ्रष्टाचार पर लगाम: मैनुअल प्रक्रियाओं में होने वाली हेराफेरी पर रोक लगेगी।
  • 24/7 उपलब्धता: सेवाएं चौबीसों घंटे ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगी।
  • त्वरित समाधान: आवेदनों का निपटारा अब निर्धारित समय सीमा (RTS) के भीतर होगा।

अगली कार्रवाई: प्रशिक्षण और जागरूकता

सरकार अब राज्य भर के न्याय पंचायतों और कॉमन सर्विस सेंटरों (CSC) के संचालकों को इन पोर्टल्स के उपयोग के लिए प्रशिक्षित करेगी। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि कम पढ़े-लिखे लोग भी इन सेवाओं का लाभ उठा सकें।

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