देहरादून: उत्तराखंड की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और स्वावलंबी बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बड़ी पहल की है। राजधानी देहरादून में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ‘डिजिटल ट्रांसफर’ के जरिए प्रदेश की 484 एकल महिलाओं के बैंक खातों में 3 करोड़ 11 लाख रुपये से अधिक की धनराशि सीधे हस्तांतरित की। योजना का मुख्य उद्देश्य विधवा, परित्यक्ता और अविवाहित महिलाओं को स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
योजना की मुख्य विशेषताएं: स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह योजना उन महिलाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगी जो अकेले अपने परिवार की जिम्मेदारी उठा रही हैं:
- भारी सब्सिडी का प्रावधान: इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी (अधिकतम 1 लाख रुपये) दी जा रही है।
- व्यवसाय के विकल्प: महिलाएं अपनी रुचि के अनुसार सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, डेयरी फार्मिंग, लघु उद्योग या किसी भी छोटे व्यवसाय के लिए ऋण और अनुदान प्राप्त कर सकती हैं।
- बिना किसी जटिलता के लाभ: योजना की आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है ताकि दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं भी इसका लाभ आसानी से उठा सकें।
“महिला सशक्तिकरण से ही समृद्ध होगा उत्तराखंड” – CM धामी
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया:
- मातृशक्ति का सम्मान: मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के निर्माण और इसके विकास में महिलाओं का अतुलनीय योगदान है। यह योजना एकल महिलाओं के आत्मसम्मान को बढ़ाने का एक प्रयास है।
- भ्रष्टाचार मुक्त हस्तांतरण: उन्होंने गर्व के साथ उल्लेख किया कि डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से बिना किसी बिचौलिये के पूरी राशि सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंची है।
- आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य: मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब हमारी माताएं-बहनें आत्मनिर्भर होंगी, तभी ‘विकसित उत्तराखंड’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना साकार होगा।
लाभार्थियों में उत्साह: अब नहीं मांगना होगा सहारा
योजना का लाभ पाने वाली महिलाओं के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। उत्तरकाशी और चमोली जैसे जिलों से आई लाभार्थियों ने कहा कि इस आर्थिक सहायता से वे अब अपना छोटा स्टोर या उद्यम शुरू कर सकेंगी, जिससे उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में उन महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है जिनकी वार्षिक आय 2 लाख रुपये से कम है।





