Sunday, November 30, 2025

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उत्तराखंड: दिवाली के बाद होंगे ग्राम पंचायत सदस्यों के उप चुनाव, 33 हजार से अधिक पद खाली; नए सिरे से भेजा जाएगा प्रस्ताव

देहरादून। उत्तराखंड में अब दिवाली के बाद 33,114 ग्राम पंचायत सदस्यों के पदों पर उप चुनाव कराए जाएंगे। पहले इन उप चुनावों को 15 अक्तूबर तक संपन्न कराने की तैयारी थी और सरकार से इस संबंध में अनुमोदन भी मिल चुका था, लेकिन अब राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम को स्थगित करते हुए नई तिथियों का प्रस्ताव फिर से भेजने का निर्णय लिया है।
55 हजार पदों पर प्रस्ताव, 33 हजार अब भी खाली
पंचायती राज सचिव चंद्रेश कुमार ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायतों में कुल 55,587 पदों पर उप चुनाव का प्रस्ताव तैयार किया था (हरिद्वार को छोड़कर)। इनमें से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने चुनाव में हिस्सा लेने या नामांकन दाखिल करने में रुचि नहीं दिखाई। परिणामस्वरूप 33,114 ग्राम पंचायत सदस्य पद अब भी खाली रह गए हैं।
नामांकन न होने से 4843 पंचायतों का गठन अधर में
पंचायती राज विभाग के अनुसार, 4843 ग्राम पंचायतों में दो-तिहाई सदस्य निर्वाचित न होने के कारण उनका गठन अब तक नहीं हो पाया है। कई स्थानों पर नामांकन पत्र जमा नहीं किए गए, जबकि कुछ पंचायतों में कोरम पूरा नहीं होने से गठन की प्रक्रिया अधर में है।
किन जिलों में नहीं हो पाया पंचायतों का गठन
राज्य के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में पंचायतें अब भी बिना गठन के हैं।
• देहरादून: 117 ग्राम पंचायतें
• पौड़ी गढ़वाल: 819
• उत्तरकाशी: 303
• अल्मोड़ा: 925
• पिथौरागढ़: 378
• चमोली: 448
• नैनीताल: 330
• ऊधमसिंह नगर: 98
• टिहरी गढ़वाल: 680
• बागेश्वर: 272
• चंपावत: 265
• रुद्रप्रयाग: 208
इन सभी जिलों में नामांकन न होने, कोरम का अभाव, या चुनाव न्यायालय के विचाराधीन रहने जैसी वजहों से पंचायतों का गठन नहीं हो सका है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अधिकांश पंचायतों में ग्राम प्रधान निर्वाचित हैं, परंतु सदस्यों के अभाव में पंचायतों का कामकाज पूर्ण रूप से शुरू नहीं हो पा रहा है।
दिवाली के बाद उप चुनावों की नई तिथि तय होगी
सचिव चंद्रेश कुमार ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने शासन को उप चुनावों की तिथियों का नया प्रस्ताव तैयार कर भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। यह प्रक्रिया दिवाली के बाद शुरू होगी। उन्होंने कहा कि पंचायतों के सुचारू संचालन और विकास कार्यों के लिए इन उप चुनावों को समय पर पूरा करना आवश्यक है।
उत्तराखंड में इस बार ग्राम पंचायत चुनावों में ग्रामीणों की रुचि कम रहने से स्थानीय निकायों की संरचना अधूरी रह गई है। अब सरकार और निर्वाचन आयोग का फोकस दिवाली के बाद इन अधूरे पदों को भरकर पंचायत व्यवस्था को पूर्ण रूप से सक्रिय करने पर है।

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