Friday, February 13, 2026

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उत्तराखंड: जमीन खरीदना हुआ महंगा, प्रदेश में नए सर्किल रेट लागू; 22 प्रतिशत तक बढ़ोतरी

देहरादून। उत्तराखंड में संपत्ति खरीदने की चाह रखने वालों के लिए अब जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। प्रदेश सरकार ने दो साल बाद भूमि और भवनों के नए सर्किल रेट लागू कर दिए हैं, जिनमें अधिकतम 22 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। इस फैसले के साथ अब राज्य में जमीन, आवासीय फ्लैट और व्यावसायिक भवन खरीदना पहले से कहीं महंगा हो गया है।

सरकार के अनुसार, राज्यभर में तेजी से बढ़ रहे निर्माण कार्यों और जमीनों की बढ़ती मांग को देखते हुए सर्किल रेट संशोधित किए गए हैं। वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने पुष्टि की कि रविवार से नए सर्किल रेट प्रभावी हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यह संशोधन प्रदेश के राजस्व को बढ़ाने के साथ-साथ भूमि बाजार में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से किया गया है।

इस बार 9 से 22 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है, जो क्षेत्र और संपत्ति के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होगी। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जैसे शहरी जिलों में यह बढ़ोतरी अधिक मानी जा रही है, जहां आवासीय व व्यावसायिक निर्माण तेजी से बढ़ रहे हैं।

सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को नए सर्किल रेट लागू करने के निर्देश दे दिए हैं। रविवार को देहरादून जिला प्रशासन ने भी औपचारिक रूप से नए दर जारी कर दिए, जो 5 अक्टूबर से प्रभावी हो गए हैं।

वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, क्योंकि जमीनों, मकानों और दुकानों की रजिस्ट्री अब उच्च दरों पर होगी। इससे सरकार को स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क के रूप में अधिक आय प्राप्त होगी।

गौरतलब है कि वर्ष 2023 में प्रदेश सरकार ने पिछली बार सर्किल रेट बढ़ाए थे। उसके बाद से भूमि बाजार में तेजी आई थी, जिसके चलते शासन स्तर पर लंबे समय से नए रेट तय करने पर मंथन चल रहा था। जिलों से प्राप्त प्रस्तावों में कुछ तकनीकी त्रुटियां सामने आने के बाद शासन ने जिलाधिकारियों से संशोधित प्रस्ताव मांगे थे। समीक्षा के बाद अब यह नई दरें लागू कर दी गई हैं।

सरकार का मानना है कि सर्किल रेट में यह संशोधन भूमि मूल्यांकन को वास्तविक बाजार दरों के करीब लाएगा, जबकि रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि इससे संपत्ति की खरीद-फरोख्त में अस्थायी गिरावट आ सकती है।

अब देखना यह होगा कि नई दरों के प्रभाव में राज्य के संपत्ति बाजार की रफ्तार कितनी बरकरार रहती है।

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