Monday, January 12, 2026

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उत्तराखंड को बड़ी सौगात: हल्द्वानी-अल्मोड़ा ग्रीन फील्ड हाईवे को केंद्र की हरी झंडी, कैंची धाम के जाम से मिलेगी मुक्ति

हल्द्वानी/देहरादून। उत्तराखंड में कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हल्द्वानी से अल्मोड़ा के बीच प्रस्तावित ‘ग्रीन फील्ड हाईवे’ को केंद्र सरकार ने अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस नए हाईवे के निर्माण से न केवल कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों की दूरी कम होगी, बल्कि विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कैंची धाम पर होने वाले वाहनों के अत्यधिक दबाव से भी बड़ी राहत मिलेगी।

क्या है ग्रीन फील्ड हाईवे प्रोजेक्ट?

ग्रीन फील्ड हाईवे का अर्थ है कि यह सड़क पुराने रास्तों को चौड़ा करने के बजाय बिल्कुल नए एलाइनमेंट पर बनाई जाएगी। यह हाईवे हल्द्वानी के पास से शुरू होकर सीधे अल्मोड़ा को जोड़ेगा। इसके निर्माण में अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का उपयोग किया जाएगा, जिससे सफर सुरक्षित और सुहावना होगा। इस परियोजना पर केंद्र सरकार की मुहर लगने के बाद अब इसके लिए भूमि अधिग्रहण और डीपीआर (DPR) की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

कैंची धाम और भवाली को मिलेगा जाम से छुटकारा

वर्तमान में हल्द्वानी से अल्मोड़ा या पिथौरागढ़ जाने वाले अधिकांश वाहन भवाली और कैंची धाम होकर गुजरते हैं। बाबा नीम करोली के दर्शन के लिए उमड़ने वाली भीड़ के कारण इस मार्ग पर घंटों लंबा जाम लगा रहता है। नया ग्रीन फील्ड हाईवे बनने के बाद, पहाड़ की ओर जाने वाला भारी ट्रैफिक इस नए रूट पर डायवर्ट हो जाएगा। इससे कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को आसानी होगी और स्थानीय निवासियों को भी रोजाना के जाम से निजात मिलेगी।

समय और दूरी में होगी भारी बचत

नए हाईवे की संरचना इस तरह तैयार की जा रही है कि यह पहाड़ों के कठिन घुमावों को कम कर सके। अनुमान है कि इस मार्ग के तैयार होने के बाद हल्द्वानी से अल्मोड़ा की दूरी लगभग 20 से 30 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। साथ ही, बेहतर सड़क चौड़ाई और कम घुमाव होने के कारण यात्रा के समय में करीब 1 से 1.5 घंटे की बचत होगी। इसका सीधा लाभ व्यापारिक गतिविधियों और आपातकालीन सेवाओं को मिलेगा।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था को लगेंगे पंख

केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि यह हाईवे कुमाऊं की अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। बेहतर कनेक्टिविटी से अल्मोड़ा, रानीखेत और बागेश्वर जैसे क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, पहाड़ के फल, सब्जी और अन्य स्थानीय उत्पादों को समय पर मंडियों तक पहुँचाना आसान हो जाएगा।

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