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उत्तराखंड के PRD स्वयंसेवकों के लिए खुशखबरी: 365 दिन रोजगार और होमगार्ड के समान मानदेय का प्रस्ताव कैबिनेट में लाने की तैयारी

देहरादून। उत्तराखंड के प्रांतीय रक्षक दल (PRD) स्वयंसेवकों के लिए राज्य सरकार की ओर से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार अब पीआरडी स्वयंसेवकों को वर्ष के पूरे 365 दिन रोजगार सुनिश्चित करने और उन्हें होमगार्ड कर्मियों के समान मानदेय प्रदान करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल मंत्री रेखा आर्या ने विभागीय अधिकारियों को इन दोनों महत्वपूर्ण मांगों पर विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

मंत्री के आश्वासन के बाद धरना समाप्त, सचिवालय में हुई अहम बैठक

विभागीय मंत्री रेखा आर्या के सकारात्मक आश्वासन और ठोस कार्रवाई के भरोसे के बाद पीआरडी कर्मियों ने अपना लंबा चल रहा धरना-प्रदर्शन समाप्त करने का निर्णय लिया है। सोमवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में मंत्री ने स्वयंसेवकों के प्रतिनिधियों के साथ उनकी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की।

  • मानदेय में वृद्धि का प्रस्ताव: बैठक के दौरान जानकारी दी गई कि पीआरडी स्वयंसेवकों को होमगार्ड के समान मानदेय देने संबंधी विस्तृत प्रस्ताव पहले ही शासन को भेजा जा चुका है। वर्तमान में यह प्रस्ताव वित्त विभाग के पास परीक्षण के लिए लंबित है।
  • 300 से बढ़कर 365 दिन का रोजगार: पहले पीआरडी कर्मियों को वर्ष में 300 दिन रोजगार देने का विचार था, लेकिन अब मंत्री के निर्देशानुसार उन्हें पूरे 365 दिन (वर्षभर) काम देने का नया प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

कैबिनेट के समक्ष जल्द रखा जाएगा प्रस्ताव

युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन दोनों प्रस्तावों पर त्वरित कार्रवाई की जाए ताकि इन्हें जल्द से जल्द कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जा सके।

“राज्य के विकास और सुरक्षा व्यवस्था में पीआरडी स्वयंसेवकों का योगदान अतुलनीय है। उनकी जायज मांगों को पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है। हमने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 365 दिन रोजगार और समान मानदेय के प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष प्राथमिकता से रखा जाए।”

बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

सचिवालय में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें विशेष प्रमुख सचिव (खेल) अमित सिन्हा, खेल निदेशक आशिष चौहान, अपर निदेशक अजय अग्रवाल और राजेश ममगाईं प्रमुख थे। अधिकारियों ने मंत्री को आश्वस्त किया कि वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं की जांच के बाद प्रस्तावों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

सरकार के इस कदम से राज्य के हजारों पीआरडी स्वयंसेवकों के परिवारों को आर्थिक स्थिरता मिलने की उम्मीद है। यह निर्णय न केवल स्वयंसेवकों का मनोबल बढ़ाएगा, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और अन्य नागरिक सेवाओं में उनकी भागीदारी को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा।

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