देहरादून: उत्तराखंड में विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों से सेवाएं दे रहे हजारों संविदा, दैनिक वेतन भोगी और उपनल कर्मियों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार प्रदेश के संविदा कर्मियों के नियमितीकरण (Regularization) के लिए निर्धारित ‘कट-ऑफ डेट’ को वर्ष 2018 से बढ़ाकर वर्ष 2022 करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि शासन स्तर पर इस प्रस्ताव पर मुहर लगती है, तो हजारों की संख्या में वे कर्मचारी भी पक्की नौकरी के दायरे में आ जाएंगे जो अब तक तकनीकी कारणों से बाहर थे।
क्या है नया प्रस्ताव और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
हाल ही में राज्य सरकार ने संविदा कर्मियों के विनियमितीकरण के लिए संशोधित नियमावली-2025 जारी की थी। इस नियमावली के तहत केवल उन्हीं कर्मियों को नियमित किया जाना था, जिन्होंने 4 दिसंबर 2018 तक अपनी सेवा के 10 वर्ष निरंतर पूरे कर लिए हों।
हालांकि, इस शर्त के कारण बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी नियमित होने से वंचित रह गए जिन्होंने 2019, 2020 या 2021 में अपने 10 साल पूरे किए हैं। कार्मिक विभाग अब मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक नया प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसमें इस समय-सीमा को बढ़ाकर वर्ष 2022 करने की तैयारी है।
कैबिनेट उप-समिति करेगी अंतिम फैसला
सचिव कार्मिक शैलेश बगौली के अनुसार, कार्मिक विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे इस प्रस्ताव को जल्द ही संविदा एवं उपनल कर्मियों के मसलों पर गठित कैबिनेट उप-समिति के समक्ष रखा जाएगा। यह समिति इस बात का आकलन कर रही है कि कट-ऑफ डेट बढ़ाने से सरकारी खजाने पर कितना वित्तीय भार आएगा और कितने नए पदों की आवश्यकता होगी।
कौन-कौन से कर्मी आएंगे दायरे में?
इस नई नीति का लाभ निम्नलिखित श्रेणियों में कार्यरत कर्मचारियों को मिलने की उम्मीद है:
- दैनिक वेतन भोगी (Daily Wagers)
- कार्य प्रभारित (Work-charged) कर्मचारी
- संविदा (Contractual) और नियत वेतन कर्मी
- अंशकालिक (Part-time) और तदर्थ (Ad-hoc) कर्मचारी
- उपनल (UPNL) के माध्यम से कार्यरत कार्मिक
कर्मचारी संगठनों की मांग और दबाव
विभिन्न कर्मचारी संगठनों और सफाई कर्मचारी संघों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि कट-ऑफ डेट को बढ़ाकर 2025 किया जाए। कर्मचारियों का तर्क है कि विभागों की लापरवाही के कारण पूर्व में कई पात्र लोग नियमित नहीं हो सके थे। अब सरकार द्वारा 2022 तक की छूट देने के संकेत मिलने से कर्मचारियों में नई उम्मीद जगी है।





