Thursday, March 5, 2026

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उत्तराखंड की सुरक्षा होगी और अभेद्य: वायु सेना को सौंपी जाएंगी गौचर और चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टियां; धामी कैबिनेट ने प्रस्ताव को दी हरी झंडी

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने सामरिक दृष्टि से एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य की दो प्रमुख हवाई पट्टियों को भारतीय वायु सेना (IAF) के हवाले करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में चमोली जिले की गौचर और उत्तरकाशी जिले की चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी को वायु सेना को सौंपने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। चीन सीमा के निकट स्थित इन दोनों हवाई पट्टियों के वायु सेना के नियंत्रण में आने से सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य बुनियादी ढांचे और निगरानी क्षमता में भारी इजाफा होगा।

सामरिक महत्व: क्यों जरूरी था यह फैसला?

गौचर और चिन्यालीसौड़ दोनों ही स्थान वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के बेहद करीब हैं।

  • चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी): यह हवाई पट्टी चीन सीमा के सबसे नजदीक स्थित है। इसके वायु सेना के पास जाने से फाइटर जेट्स और भारी मालवाहक विमानों का संचालन सुगम हो जाएगा, जिससे आपात स्थिति में सेना की पहुँच तेज होगी।
  • गौचर (चमोली): बद्रीनाथ और केदारनाथ के प्रवेश द्वार पर स्थित यह हवाई पट्टी न केवल सैन्य गतिविधियों बल्कि आपदा प्रबंधन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विकास और सुरक्षा का साझा मॉडल

कैबिनेट द्वारा पास किए गए प्रस्ताव के अनुसार, इन हवाई पट्टियों का स्वामित्व अब वायु सेना के पास होगा, लेकिन राज्य सरकार ने इसके साथ कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी रखी हैं:

  1. नागरिक उड़ानें जारी रहेंगी: वायु सेना द्वारा इन हवाई पट्टियों का विस्तार और आधुनिकीकरण किया जाएगा, लेकिन क्षेत्रीय संपर्क योजना (UDAN) के तहत नागरिक उड़ानों का संचालन भी पहले की तरह जारी रहेगा।
  2. आधुनिक बुनियादी ढांचा: वायु सेना यहां अत्याधुनिक रडार सिस्टम, एटीसी टावर और बेहतर रनवे विकसित करेगी, जिसका लाभ प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’ में भी मिलेगा।
  3. रोजगार और व्यापार: हवाई पट्टियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर ढांचागत विकास होगा, जिससे आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

अतिक्रमण और भूमि विस्तार पर होगी कार्रवाई

वायु सेना के मानकों के अनुरूप रनवे की लंबाई बढ़ाने के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी। कैबिनेट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे हवाई पट्टियों के विस्तार के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण और आसपास के क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में तेजी लाएं।

आपदा प्रबंधन में मिलेगी बड़ी राहत

उत्तराखंड एक आपदा संवेदनशील राज्य है। 2013 की केदारनाथ आपदा के समय चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टियों ने हजारों लोगों की जान बचाने में लाइफलाइन का काम किया था। अब वायु सेना के प्रबंधन में यहां चौबीसों घंटे विमानों के संचालन की सुविधा उपलब्ध होगी, जो भविष्य की चुनौतियों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करेगी।

“राष्ट्रीय सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टियों को वायु सेना को सौंपने से हमारी सीमाओं की सुरक्षा और भी सशक्त होगी। यह निर्णय सैन्य सशक्तिकरण और पर्यटन विकास के बीच एक सेतु का काम करेगा।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

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