देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की किल्लत को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के लिए 1600 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न नई पेयजल योजनाओं को प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी दे दी गई है। इन योजनाओं के माध्यम से न केवल दूरस्थ पहाड़ी गांवों तक स्वच्छ पानी की पहुंच सुनिश्चित की जाएगी, बल्कि तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में भी पानी की किल्लत को दूर किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य आगामी वर्षों में हर घर तक पाइप के माध्यम से शुद्ध जल पहुँचाना है।
योजना का मुख्य खाका: कहां और कैसे होगा काम?
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत इस भारी-भरकम बजट का उपयोग जल जीवन मिशन और अन्य राज्य स्तरीय परियोजनाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए किया जाएगा:
- शहरी क्षेत्रों का कायाकल्प: देहरादून, हल्द्वानी और हरिद्वार जैसे शहरों में पुरानी पाइपलाइनों को बदलने और नए ओवरहेड टैंक बनाने पर एक बड़ा हिस्सा खर्च होगा।
- पंपिंग और ग्रेविटी योजनाएं: पहाड़ी जिलों में जहाँ पानी के स्रोत नीचे हैं, वहां नई ‘लिफ्ट पेयजल योजनाएं’ (Pumping Schemes) स्थापित की जाएंगी। वहीं, प्राकृतिक स्रोतों से पानी लाने वाली ‘ग्रेविटी योजनाओं’ का भी नवीनीकरण किया जाएगा।
- भंडारण क्षमता में वृद्धि: कई क्षेत्रों में पानी की कमी का मुख्य कारण भंडारण की कमी है, जिसे दूर करने के लिए आधुनिक जलाशयों का निर्माण किया जाएगा।
कैबिनेट के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
पेयजल के साथ-साथ सरकार ने जल प्रबंधन से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित किया है:
- गुणवत्ता नियंत्रण: पेयजल की शुद्धता जांचने के लिए जिला स्तर पर नई आधुनिक प्रयोगशालाएं (Labs) स्थापित की जाएंगी।
- सौर ऊर्जा का उपयोग: बिजली के खर्च को कम करने के लिए पंपिंग योजनाओं को सौर ऊर्जा से जोड़ने का प्रस्ताव भी इस बजट में शामिल है।
- रोजगार के अवसर: 1600 करोड़ के इन निर्माण कार्यों के जरिए स्थानीय ठेकेदारों और श्रमिकों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री का संबोधन: “हर घर जल, हमारा संकल्प”
बैठक के बाद मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर जल’ के सपने को उत्तराखंड में धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है।
“उत्तराखंड नदियों का मायका है, इसके बावजूद हमारे कई क्षेत्रों में पानी की कमी एक चुनौती रही है। 1600 करोड़ रुपये की ये योजनाएं जल संकट को जड़ से खत्म करने में मील का पत्थर साबित होंगी। हमारा प्रयास है कि माताओं-बहनों को पानी के लिए दूर न जाना पड़े।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री





