Wednesday, January 7, 2026

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उत्तराखंड: एडमिशन के नाम पर डोनेशन लेने वाले निजी स्कूलों पर गिरेगी गाज, मान्यता रद करने की तैयारी

देहरादून: उत्तराखंड में नए शैक्षणिक सत्र (2026-27) के करीब आते ही शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों की मनमानी और अवैध वसूली पर नकेल कसने के लिए कमर कस ली है। शासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी निजी स्कूल छात्र के दाखिले के नाम पर किसी भी प्रकार का ‘डोनेशन’ या ‘कैपिटेशन शुल्क’ मांगता पाया गया, तो उसकी मान्यता तत्काल प्रभाव से रद कर दी जाएगी।

पारदर्शिता के लिए कड़े निर्देश

शिक्षा विभाग द्वारा जारी ताजा गाइडलाइंस के अनुसार, प्रदेश के सभी निजी स्कूलों को अब हर साल 15 सितंबर तक अपनी वेबसाइट पर एक विस्तृत ‘सूचना रिपोर्ट’ (Information Report) अपलोड करना अनिवार्य होगा। इस रिपोर्ट में स्कूल के बुनियादी ढांचे, शिक्षकों की योग्यता, उपलब्धियों और सबसे महत्वपूर्ण, फीस संरचना का पूरा विवरण देना होगा।

प्रमुख कार्रवाई और नए नियम:

  • मान्यता पर खतरा: नियमों का उल्लंघन करने वाले या बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों के खिलाफ विभाग ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। हाल ही में रुद्रप्रयाग समेत कई जिलों में ऐसे दर्जनों स्कूलों को नोटिस जारी किए गए हैं।
  • फीस वापसी का आदेश: यदि किसी स्कूल ने निर्धारित मानकों से अधिक शुल्क या डोनेशन वसूला है, तो उसे अभिभावकों को पूरी राशि वापस करनी होगी।
  • शिकायत निवारण समिति: राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद एक ‘परामर्शदात्री समिति’ का गठन किया है। अभिभावक अत्यधिक फीस, किताबों या यूनिफॉर्म के लिए किसी विशेष दुकान से खरीदारी के दबाव के खिलाफ इस समिति में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
  • वेतन और शोषण पर रोक: स्कूलों को न केवल छात्रों बल्कि शिक्षकों के हितों का भी ध्यान रखना होगा। शिक्षकों के वेतन में कटौती या उनके मानसिक उत्पीड़न की शिकायतों पर भी स्कूल की मान्यता रद की जा सकती है।

अभिभावकों को राहत की उम्मीद

शिक्षा महानिदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि और डोनेशन की निगरानी करें। अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कहा गया है कि यदि किसी क्षेत्र में अवैध वसूली की पुष्टि होती है, तो संबंधित ब्लॉक और जिला स्तरीय अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

“शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत कैपिटेशन शुल्क लेना पूरी तरह अवैध है। अभिभावकों से अनुरोध है कि वे बिना डरे विभाग को शिकायत करें, उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।” — शिक्षा विभाग, उत्तराखंड शासन

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