उत्तरकाशी। भले ही पहाड़ों में आसमान से बरसात थमी हो और मौसम फिलहाल साफ दिखाई दे रहा हो, लेकिन आपदा प्रभावित इलाकों में स्थानीय लोगों की कठिनाइयाँ अभी भी कम नहीं हुई हैं। जगह-जगह भूस्खलन और मलबे के ढेर अब भी आवागमन में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। इसका ताज़ा उदाहरण मंगलवार को तब सामने आया जब उत्तरकाशी में एक गर्भवती महिला को स्ट्रेचर के सहारे भूस्खलन जोन पार कराकर सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया गया।
पुलिस और ग्रामीणों की संयुक्त पहल
जानकारी के अनुसार, जिले के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। परिजन उसे अस्पताल ले जाने को लेकर चिंतित थे, लेकिन सड़क पर भरे मलबे और टूटे हिस्सों के कारण वाहन उस स्थान तक नहीं पहुँच पा रहे थे। ऐसे में यातायात पुलिस और स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने मिलकर महिला को स्ट्रेचर पर लिटाया और जोखिम भरे भूस्खलन जोन को पैदल पार कराया। इसके बाद ही महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुँचाया जा सका।
“मौसम खुला, लेकिन चुनौतियाँ कायम”
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से पहाड़ी दरकने की घटनाएँ आम हो गई हैं। अब बारिश थमी जरूर है, लेकिन टूटी सड़कों और मलबे से हालात अब भी बहुत मुश्किल हैं। गांवों में रहने वाले लोग रोज़मर्रा की जरूरतों की आपूर्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए परेशान हैं।
आपदा प्रबंधन और राहत कार्य जारी
यातायात पुलिस ने बताया कि टीम लगातार प्रभावित क्षेत्रों में तैनात है। प्राथमिकता उन लोगों को सुरक्षित निकालने की है जिन्हें तुरंत चिकित्सकीय मदद की आवश्यकता है। प्रशासन ने भूस्खलन प्रभावित स्थानों से मलबा हटाने और सड़क खोलने का कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ इसमें बड़ी बाधा बन रही हैं।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बिना आवश्यकता जोखिम वाले क्षेत्रों में आवाजाही न करें और आपात स्थिति में तुरंत पुलिस या प्रशासन से संपर्क करें।





