उत्तरकाशी जिले की यमुना घाटी के ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति व्यवस्था अब भी पटरी पर नहीं लौट सकी है। सड़क मार्ग अवरुद्ध होने और वाहन न पहुँच पाने की स्थिति में स्थानीय लोग खच्चरों के जरिए आवश्यक वस्तुएँ, खाद्यान्न और घरेलू गैस सिलिंडर गाँव-गाँव तक पहुँचाने को मजबूर हैं। हालांकि इस वैकल्पिक व्यवस्था से सामान पहुँच तो रहा है, लेकिन ग्रामीणों की परेशानी कम होने के बजाय और बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि खच्चरों से सामान ढोने में समय भी अधिक लगता है और लागत भी दोगुनी हो जाती है। रोज़मर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएँ जैसे आटा, चावल, दाल, तेल और नमक तक महँगे दामों पर मिल रहे हैं। वहीं गैस सिलिंडरों की आपूर्ति सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। एक सिलिंडर खच्चर पर गाँव तक पहुँचाने का किराया इतना ज्यादा हो जाता है कि आम परिवार के लिए उसे वहन करना कठिन हो गया है।
स्थानीय दुकानदार बताते हैं कि वाहन बंद होने के कारण उनका कारोबार लगभग ठप हो गया है। जो भी सामान पहुँचता है, वह सीमित मात्रा में होता है और तुरंत बिक जाता है। इससे ग्रामीणों को कई बार खाली हाथ लौटना पड़ता है।
ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द मार्ग दुरुस्त करने की माँग की है। उनका कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो त्योहारों के मौसम में खाद्यान्न और ईंधन की भारी किल्लत हो सकती है।
प्रशासन की ओर से दावा किया जा रहा है कि सड़क मार्ग को बहाल करने के प्रयास जारी हैं और जल्द ही यातायात सामान्य हो जाएगा। लेकिन तब तक यमुना घाटी के ग्रामीणों को खच्चरों पर निर्भर रहकर ही अपनी ज़रूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं।





