तेहरान/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध अब अपने दसवें दिन में प्रवेश कर चुका है और स्थितियां लगातार भयावह होती जा रही हैं। अमेरिका और इजरायल के भीषण हमलों का सामना कर रहा ईरान अब पूरी दुनिया से कट गया है। इस बीच, ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक बड़ा बयान जारी कर अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे कूटनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।
1. देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट: 9 करोड़ लोग अंधेरे में
ईरान में पिछले 10 दिनों से इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप हैं।
- डिजिटल सन्नाटा: अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट वॉचडॉग ‘नेटब्लॉक्स’ के अनुसार, ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी सामान्य स्तर से गिरकर मात्र 1% रह गई है।
- सूचनाओं पर पहरा: यह ब्लैकआउट न केवल आंतरिक संचार को बाधित कर रहा है, बल्कि युद्ध की जमीनी हकीकत को भी बाहर आने से रोक रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम नागरिक आंदोलनों को रोकने और सैन्य अभियानों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
2. ईरानी विदेश मंत्रालय का तीखा हमला: ‘तेल के लिए हो रहा युद्ध’
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने वैश्विक मीडिया के माध्यम से अमेरिका के इरादों पर सवाल उठाए हैं:
- संसाधनों पर नजर: ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ‘लोकतंत्र’ और ‘सुरक्षा’ के नाम पर वास्तव में ईरान के विशाल तेल और गैस संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है।
- युद्ध अपराध का आरोप: मंत्रालय ने कहा कि इजरायल और अमेरिका द्वारा ईंधन डिपो और रिफाइनरियों को निशाना बनाना एक ‘युद्ध अपराध’ है, जिसका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना है।
3. राष्ट्रपति ट्रंप का कड़ा रुख और ‘नया नक्शा’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष में बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है:
- बिना शर्त आत्मसमर्पण: ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब तक ईरान ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ (Unconditional Surrender) नहीं करता, तब तक हमले नहीं रुकेंगे।
- सैनिकों की तैनाती: उन्होंने ईरान के परमाणु केंद्रों को सुरक्षित करने के लिए अमेरिकी थल सेना भेजने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।
4. वैश्विक ऊर्जा संकट: $110 के पार पहुँचा कच्चा तेल
युद्ध की आग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी झुलसा दिया है:
- महंगा हुआ तेल: सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछलकर $110 प्रति बैरल के पास पहुँच गईं।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है, जिससे दुनिया की 20% तेल आपूर्ति ठप होने का खतरा पैदा हो गया है।
5. भारत की ‘पैनी नजर’ और नागरिकों की सुरक्षा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में भारत का पक्ष रखा:
- उच्च स्तरीय निगरानी: प्रधानमंत्री मोदी स्वयं पल-पल की स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
- एक करोड़ भारतीयों की चिंता: खाड़ी देशों में मौजूद करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। भारत ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करने की एक बार फिर अपील की है।





