Monday, January 12, 2026

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ईरान में कोहराम: गृहयुद्ध जैसी स्थिति के बीच अब तक 538 लोगों की मौत; सड़कों पर आगजनी और भीषण तोड़फोड़ से दहला तेहरान

तेहरान/दुबई: ईरान में सत्ता परिवर्तन और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर भड़का जनाक्रोश अब पूरी तरह बेकाबू हो चुका है। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच जारी खूनी संघर्ष में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 538 तक पहुंच गया है। ईरान के मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय निगरानी समूहों ने पुष्टि की है कि पिछले कुछ दिनों में हिंसा की तीव्रता में भारी इजाफा हुआ है। तेहरान सहित देश के कई प्रमुख शहरों में आगजनी, सरकारी संपत्तियों में तोड़फोड़ और गोलाबारी की खबरें आ रही हैं, जिससे पूरे देश में दहशत का माहौल है।

हिंसा और तबाही का मंजर

ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य बड़े प्रांतों से आ रही तस्वीरें देश की बिगड़ती कानून व्यवस्था की गवाही दे रही हैं:

  • सरकारी इमारतों को बनाया निशाना: आक्रोशित भीड़ ने कई पुलिस स्टेशनों, बैंक शाखाओं और धार्मिक संस्थानों की इमारतों में आग लगा दी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे दमनकारी शासन के प्रतीकों को नष्ट कर रहे हैं।
  • सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई: जवाब में सुरक्षा बलों (विशेष रूप से रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) ने प्रदर्शनकारियों पर लाइव गोला-बारूद और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया है। 538 मौतों में बड़ी संख्या युवाओं और महिलाओं की बताई जा रही है।
  • शहरों में नाकेबंदी: तेहरान की सड़कों पर टायर जलाकर रास्ते जाम कर दिए गए हैं, जिससे परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।

मौतों का बढ़ता आंकड़ा और मानवाधिकार चिंताएं

स्वतंत्र सूत्रों के अनुसार, हताहतों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है:

  1. अस्पतालों में आपातकाल: घायलों की संख्या हजारों में पहुंच गई है, जिससे ईरान के अस्पतालों में दवाओं और बेड की भारी कमी हो गई है। कई घायल गिरफ्तारी के डर से घर पर ही इलाज कराने को मजबूर हैं।
  2. इंटरनेट ब्लैकआउट: सरकार ने सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए देश के बड़े हिस्सों में इंटरनेट सेवा को पूरी तरह बंद कर दिया है, जिससे सटीक जानकारी जुटाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

क्यों नहीं थम रहा है जनाक्रोश?

यह आंदोलन जो शुरू में हिजाब और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दे पर शुरू हुआ था, अब शासन के पूर्ण तख्तापलट की मांग में बदल गया है।

  • आर्थिक बदहाली: रिकॉर्ड तोड़ महंगाई और बेरोजगारी ने आम जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
  • दमनकारी नीतियां: प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार संवाद करने के बजाय गोलियों का सहारा लेकर उनकी आवाज दबाना चाहती है, जिससे लोग और अधिक उग्र हो रहे हैं।

वैश्विक बिरादरी की तीखी प्रतिक्रिया

538 मौतों की खबर के बाद संयुक्त राष्ट्र और कई पश्चिमी देशों ने ईरान की कड़ी निंदा की है:

  • प्रतिबंधों की चेतावनी: अमेरिका और यूरोपीय संघ ने संकेत दिए हैं कि यदि हिंसा तुरंत नहीं रुकी, तो ईरान पर और अधिक कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
  • अंतरराष्ट्रीय दबाव: मानवाधिकार संगठनों ने इन मौतों की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की मांग की है।

निष्कर्ष: नाजुक मोड़ पर ईरान

ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। 538 लोगों की शहादत ने इस आंदोलन को एक ऐसी चिंगारी दे दी है जिसे बुझाना वर्तमान शासन के लिए असंभव होता जा रहा है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि ईरान संवाद का रास्ता चुनता है या यह संघर्ष किसी बड़ी तबाही की ओर ले जाएगा।

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