वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच वहां की सरकार को सख्त चेतावनी जारी की है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि ईरानी प्रशासन ने अपने ही देश के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा का रास्ता अपनाया या उनकी हत्या की, तो अमेरिका मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के कई शहरों में आर्थिक बदहाली और राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
‘दुनिया की नजरें आप पर हैं’ सोशल मीडिया के माध्यम से जारी अपने संदेश में ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को संबोधित करते हुए कहा कि वे प्रदर्शनकारियों का दमन बंद करें। उन्होंने चेतावनी दी कि 2009 के ‘ग्रीन मूवमेंट’ के दौरान हुई हिंसा को दोहराया नहीं जाना चाहिए। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि “दुनिया देख रही है” और ईरान को अपने नागरिकों की शांतिपूर्ण आवाज सुनने की जरूरत है। राष्ट्रपति ने साफ किया कि मानवाधिकारों का उल्लंघन होने की स्थिति में अमेरिका अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कड़े कदम उठा सकता है।
अस्थिरता के बीच अमेरिका का सख्त रुख ईरान में इंटरनेट पर पाबंदियों और प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की खबरों के बीच, व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि वह स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ईरानी जनता को अपनी सरकार के खिलाफ बोलने का मौलिक अधिकार है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की यह चेतावनी केवल मौखिक नहीं है, बल्कि यह भविष्य में ईरान पर और अधिक कड़े प्रतिबंध (Sanctions) लगाने या सैन्य दबाव बढ़ाने का आधार बन सकती है।
ईरान की संभावित प्रतिक्रिया दूसरी ओर, ईरान अक्सर ऐसे बयानों को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार देता रहा है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका इन प्रदर्शनों को हवा देकर देश में अस्थिरता पैदा करना चाहता है। हालांकि, ट्रंप के इस सीधे हस्तक्षेप वाले बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है, जिससे मध्य पूर्व (Middle East) में शांति और सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।





