Saturday, January 31, 2026

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ईरान के रणक्षेत्र से सुरक्षित वतन लौटे सैकड़ों भारतीय: दिल्ली एयरपोर्ट पर छलके खुशी के आंसू; प्रवासियों ने पीएम मोदी का जताया आभार, बोले- ‘संकट में बस तिरंगे का ही सहारा था’

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में युद्ध के बादलों के बीच ईरान में फंसे सैकड़ों भारतीय नागरिक विशेष विमानों के जरिए सुरक्षित स्वदेश लौट आए हैं। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जैसे ही इन यात्रियों ने कदम रखा, वहां का माहौल देशभक्ति के नारों और खुशी के आंसुओं से भर गया। वतन वापसी करने वाले इन भारतीयों ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की त्वरित कार्रवाई की जमकर सराहना की। हवाई अड्डे पर मीडिया से बात करते हुए कई यात्रियों ने एक स्वर में कहा, “मोदी जी हैं तो हर चीज मुमकिन है।” उन्होंने बताया कि कैसे ईरान में बिगड़ते सुरक्षा हालातों और उड़ानों के रद्द होने के बाद वे डर के साए में थे, लेकिन भारतीय दूतावास की सक्रियता ने उन्हें नई जिंदगी दी है।

खौफनाक थे ईरान के हालात: यात्रियों की आपबीती

स्वदेश लौटे यात्रियों ने ईरान में बिताए पिछले कुछ दिनों का आंखों देखा हाल सुनाया:

  • युद्ध का साया: यात्रियों के अनुसार, तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में सायरन की आवाजें और आसमान में मिसाइलों की हलचल ने उन्हें दहशत में डाल दिया था। कई जगहों पर संचार सेवाएं भी बाधित हो रही थीं।
  • दूतावास का साथ: तेहरान में रहने वाले एक छात्र ने बताया कि जब सारी कमर्शियल उड़ानें बंद हो गईं, तब भारतीय दूतावास ने उनसे संपर्क किया और उन्हें सुरक्षित ‘इवैक्युएशन’ (निकासी) का भरोसा दिलाया।
  • तिरंगे की ताकत: एक अन्य प्रवासी भारतीय ने कहा कि तनाव के बीच जब हम अपनी गाड़ियों पर भारतीय तिरंगा लगाकर निकल रहे थे, तो हमें एक अलग ही सुरक्षा और सम्मान का अहसास हो रहा था।

‘ऑपरेशन’ की सफलता: मोदी सरकार की सक्रियता

भारत सरकार ने इस निकासी अभियान को बेहद गोपनीय और पेशेवर तरीके से अंजाम दिया है:

  1. 24×7 कंट्रोल रूम: विदेश मंत्रालय ने ईरान और इजरायल दोनों देशों में फंसे भारतीयों के लिए चौबीसों घंटे चलने वाली हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम स्थापित किए थे।
  2. डिप्लोमैटिक चैनल्स: प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं स्थिति की समीक्षा की और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को निर्देश दिए कि किसी भी भारतीय को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। ईरान की सरकार के साथ उच्च स्तरीय बातचीत कर सुरक्षित कॉरिडोर तैयार किया गया।
  3. विशेष विमानों की व्यवस्था: एअर इंडिया और भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों को ‘स्टैंडबाय’ पर रखा गया था, ताकि स्थिति बिगड़ने पर तत्काल बड़े पैमाने पर लोगों को निकाला जा सके।

“मोदी है तो मुमकिन है”: वैश्विक स्तर पर बढ़ी साख

हवाई अड्डे पर ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच यात्रियों ने प्रधानमंत्री के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की:

  • यात्रियों का मानना है कि यूक्रेन-रूस युद्ध और सूडान संकट के बाद अब ईरान संकट से सुरक्षित निकाल कर सरकार ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया के किसी भी कोने में भारतीय अब खुद को अकेला नहीं समझता।
  • प्रवासियों ने कहा कि आज भारत का पासपोर्ट दुनिया भर में एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह काम करता है।

निष्कर्ष: अभी और भी लोगों की वापसी का इंतज़ार

यद्यपि सैकड़ों भारतीय लौट आए हैं, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक ईरान और मध्य पूर्व के अन्य हिस्सों में मौजूद हैं। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब तक आखिरी भारतीय सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक सरकार की प्राथमिकता ‘निकासी’ ही रहेगी। सरकार ने बाकी बचे नागरिकों को सलाह दी है कि वे स्थानीय दूतावास के संपर्क में रहें और अनावश्यक यात्रा से बचें।

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