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ईरान का खाड़ी देशों को कड़ा अल्टीमेटम: ‘अपने क्षेत्र से अमेरिकी सेना को पीछे हटने पर मजबूर करो, वरना झेलना होगा विनाश’

तेहरान/दुबई। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध की आग अब और भीषण रूप लेती जा रही है। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने खाड़ी देशों को एक सीधी और कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरानी सशस्त्र बलों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनके देश पर कोई हमला होता है, तो इसका खामियाजा उन पड़ोसी देशों को भी भुगतना होगा जो अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपनी जमीन पर जगह दे रहे हैं।

ईरानी सेना की ‘विनाशकारी’ चेतावनी

शनिवार सुबह ईरानी सशस्त्र बलों के केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर क्षेत्र की स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। उनके बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • ट्रंप की धमकियों का जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में दी गई सैन्य धमकियों के जवाब में ईरान ने अपना रुख कड़ा कर लिया है।
  • ठिकानों पर निशाना: जोल्फागरी ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने ईरान के किसी भी बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को नुकसान पहुँचाया, तो ईरान का पलटवार केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा।
  • ऊर्जा और आर्थिक केंद्रों पर खतरा: ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि वह उन सहयोगी देशों के ऊर्जा (तेल और गैस) और आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाएगा, जहाँ अमेरिकी सेना की मौजूदगी है।

खाड़ी देशों के लिए संकट की स्थिति

ईरान के इस अल्टीमेटम ने उन खाड़ी देशों की चिंता बढ़ा दी है जहाँ अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य बेस स्थित हैं। इब्राहिम जोल्फागरी ने कड़े शब्दों में कहा:

“अमेरिकी सैन्य ठिकानों को पनाह देने वाले देशों पर विनाशकारी हमले किए जाएंगे। इन देशों को चाहिए कि वे अपने क्षेत्र से अमेरिकी सेना को पीछे हटने पर मजबूर करें, अन्यथा उन्हें भी इस युद्ध की भारी कीमत चुकानी होगी।”

बढ़ता वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान अपनी चेतावनी के अनुसार सहयोगी देशों के ऊर्जा केंद्रों पर हमला करता है, तो दुनिया भर में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। पहले से ही इजरायल और हमास-हिजबुल्लाह के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। अब ईरान की इस नई धमकी ने पूरे क्षेत्र को एक बड़े और सीधे सैन्य संघर्ष के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

फिलहाल, इस अल्टीमेटम के बाद खाड़ी देशों और वाशिंगटन की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि संघर्ष को और बढ़ने से रोका जा सके।

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