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ईरान-इजरायल युद्ध में मासूमों की एंट्री? रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने सेना में 12 साल के बच्चों की भर्ती शुरू की; खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए ‘बच्चों की फौज’ तैयार!

तेहरान/नई दिल्ली (27 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण युद्ध अब एक नए और भयावह मोड़ पर पहुंच गया है, जहां मासूम बच्चों को भी युद्ध की आग में झोंकने की तैयारी की जा रही है। ईरान के शक्तिशाली और खूंखार इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हाल ही में एक नई पहल के तहत देश की सुरक्षा और युद्ध सहायता कार्यों के लिए न्यूनतम आयु सीमा को घटाकर महज 12 वर्ष कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान-इजरायल युद्ध चरम पर है और ईरान अपने सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। IRGC के इस फैसले से दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में खलबली मच गई है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों और बाल अधिकारों का खुला उल्लंघन मान रहे हैं।

IRGC का नया ‘चाइल्ड सोल्जर’ प्रोग्राम: 12 साल के बच्चे संभालेंगे चेकपॉइंट्स

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बच्चों को सेना में भर्ती करने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है:

  • स्वेच्छा से भर्ती की आड़: IRGC के एक वरिष्ठ अधिकारी रहीम नदाली ने बताया कि गार्ड्स के पास एक विशेष प्रोग्राम है, जिसके तहत 12 और 13 साल के बच्चे “स्वेच्छा” से सुरक्षा और युद्ध सहायता कार्यों में शामिल हो सकते हैं।
  • युद्ध के मैदान में मासूम: नदाली के अनुसार, इन मासूम बच्चों को सड़कों पर गश्त करने, संवेदनशील इलाकों में चेकपॉइंट्स (Naka) संभालने और युद्ध के मैदान तक रसद (Logistics) पहुंचाने जैसे खतरनाक कामों में लगाया जाएगा।
  • बचपन पर वार: ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, नदाली ने दावा किया कि “कम उम्र के बच्चे आगे आकर युद्ध में हिस्सा लेने की मांग कर रहे हैं, जिसके बाद हमने न्यूनतम उम्र घटाकर 12 साल कर दी है।” यह बयान यह दर्शाता है कि ईरान सरकार बच्चों को युद्ध के लिए प्रेरित कर रही है।

खामेनेई की मौत का बदला: ‘बच्चों की फौज’ के पीछे की कूटनीति

IRGC द्वारा बच्चों को सेना में भर्ती करने के फैसले के पीछे कई राजनीतिक और कूटनीतिक कारण माने जा रहे हैं:

  1. बल और एकजुटता का प्रदर्शन: ईरान सरकार यह संदेश देना चाहती है कि पूरा देश, यहां तक कि मासूम बच्चे भी, खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए एकजुट हैं। यह ‘बच्चों की फौज’ ईरान की राष्ट्रीय एकजुटता और प्रतिशोध की भावना का प्रतीक है।
  2. सॉफ्ट पावर और सहानुभूति: ईरान सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहानुभूति हासिल करने और इजरायल को बदनाम करने के लिए बच्चों का इस्तेमाल कर सकती है। यदि युद्ध में कोई बच्चा मारा जाता है, तो ईरान इसे इजरायल के अत्याचार के रूप में प्रचारित करेगा।
  3. मानवीय ढाल की आशंका: मानवाधिकार संगठनों को डर है कि ईरान इन बच्चों को मानवीय ढाल (Human Shield) के रूप में इस्तेमाल कर सकता है, ताकि इजरायल उसके सैन्य ठिकानों पर हमला न कर सके।

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