तेल अवीव/यरूशलेम: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध की विभीषिका के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक अत्यंत आक्रामक और स्पष्ट सैन्य रुख अख्तियार कर लिया है। राष्ट्र को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने ईरान को सीधी चेतावनी दी है कि इजरायल अब ‘निर्णायक कार्रवाई’ की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने वैश्विक समुदाय और अपनी जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि “यह कोई अंतहीन युद्ध नहीं है,” बल्कि इजरायल इस संघर्ष को उसके तार्किक और विजयी अंत तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। नेतन्याहू का यह बयान ईरान द्वारा किए गए हालिया मिसाइल हमलों और हिजबुल्लाह-हमास के साथ जारी जमीनी जंग के बीच आया है, जो इस बात का संकेत है कि इजरायल अब ईरान के भीतर रणनीतिक ठिकानों पर बड़े प्रहार की योजना बना चुका है।
नेतन्याहू का संकल्प: “दुश्मन को चुकानी होगी भारी कीमत”
इजरायली प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सैन्य रणनीति के तीन मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया:
- अस्तित्व की लड़ाई: नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल सात मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है और यह उसकी संप्रभुता की रक्षा के लिए ‘अस्तित्व का युद्ध’ (War of Existence) है।
- रणनीतिक लक्ष्य: इजरायल का उद्देश्य केवल रक्षा करना नहीं, बल्कि ईरान के उस सैन्य ढांचे को ध्वस्त करना है जो क्षेत्रीय अस्थिरता का केंद्र बना हुआ है।
- समय सीमा का संकेत: “अंतहीन युद्ध नहीं” कहकर नेतन्याहू ने संकेत दिया कि इजरायल लंबी खींचने वाली जंग के बजाय तीव्र और घातक हमलों के जरिए इस अध्याय को जल्द समाप्त करना चाहता है।
ईरान के परमाणु और तेल ठिकानों पर खतरा
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘निर्णायक कार्रवाई’ के तहत इजरायल निम्नलिखित लक्ष्यों को भेद सकता है:
- परमाणु संयंत्र: इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मानता रहा है।
- ऊर्जा बुनियादी ढांचा: ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले तेल रिफाइनरियों और गैस निर्यात केंद्रों पर हमले की संभावना बढ़ गई है।
- मिसाइल बेस: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के उन ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है जहाँ से इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं।
वैश्विक दबाव और अमेरिका की भूमिका
नेतन्याहू के इस एलान ने वाशिंगटन में भी हलचल तेज कर दी है:
- बाइडन प्रशासन की चिंता: अमेरिका ने इजरायल को आत्मरक्षा का अधिकार तो दिया है, लेकिन वह परमाणु ठिकानों पर सीधे हमले के पक्ष में नहीं है, ताकि युद्ध को क्षेत्रीय महाविनाश (All-out War) में बदलने से रोका जा सके।
- अंतरराष्ट्रीय बिरादरी: संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देशों ने संयम बरतने की अपील की है, लेकिन इजरायल ने साफ कर दिया है कि उसकी सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।




