नई दिल्ली/दोहा: भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे बड़े तरल प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यातकों में से एक, कतर ने अपने प्रमुख गैस फील्ड्स में उत्पादन (Production) को अस्थाई रूप से बंद कर दिया है। इस अप्रत्याशित फैसले के कारण भारत को होने वाली गैस की आपूर्ति में 40% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। कतर द्वारा सप्लाई रोके जाने से भारतीय बाजारों में खलबली मच गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि यह संकट अगले कुछ दिनों तक जारी रहता है, तो घरेलू स्तर पर CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) और PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है, जिसका सीधा असर आम आदमी की रसोई और परिवहन पर पड़ेगा।
क्यों बंद हुआ प्रोडक्शन? तकनीकी खराबी या कूटनीतिक दबाव?
कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी ‘कतर एनर्जी’ के अनुसार, उत्पादन बंद करने के पीछे मुख्य कारण तकनीकी हैं:
- मेंटेनेंस और फॉल्ट: बताया जा रहा है कि नॉर्थ फील्ड (North Field) के कुछ प्रमुख प्लांटों में गंभीर तकनीकी खराबी आई है, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से प्रोडक्शन रोकना पड़ा।
- वैश्विक मांग का दबाव: अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की बढ़ती मांग और रेड सी (लाल सागर) में जारी तनाव के कारण भी सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।
- भारत की निर्भरता: भारत अपनी जरूरत का लगभग 48% एलएनजी (LNG) कतर से ही आयात करता है। ऐसे में कतर से सप्लाई घटना भारत के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
आम आदमी पर असर: क्या-क्या होगा महंगा?
गैस सप्लाई में 40% की कमी का सीधा असर कीमतों और उपलब्धता पर पड़ेगा:
- CNG के दाम: ऑटो, टैक्सी और निजी वाहन मालिकों को अपनी जेब और ढीली करनी पड़ सकती है। दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में CNG की कीमतें 5 से 8 रुपये प्रति किलो तक बढ़ सकती हैं।
- रसोई गैस (PNG): घरों में पाइप के जरिए पहुँचने वाली गैस की सप्लाई बाधित हो सकती है या कंपनियां घाटे की भरपाई के लिए टैरिफ में बढ़ोतरी कर सकती हैं।
- औद्योगिक उत्पादन: बिजली संयंत्रों और फर्टिलाइजर (खाद) कंपनियों को गैस की कमी का सामना करना पड़ेगा, जिससे खाद की कीमतों में भी वृद्धि की आशंका है।
सरकार की रणनीति: वैकल्पिक रास्तों की तलाश
संकट को देखते हुए भारत सरकार का पेट्रोलियम मंत्रालय सक्रिय हो गया है:
- स्पॉट मार्केट से खरीद: भारत अब कतर के विकल्प के रूप में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ऑस्ट्रेलिया से ‘स्पॉट मार्केट’ (तत्काल खरीद) के जरिए महंगी गैस खरीदने पर विचार कर रहा है।
- सुरक्षित भंडार का उपयोग: रणनीतिक गैस भंडारों (Strategic Reserves) से सप्लाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि शहरों में सीएनजी स्टेशनों पर लंबी कतारें न लगें।
- डिप्लोमैटिक टॉक: विदेश मंत्रालय कतर के अधिकारियों के साथ संपर्क में है ताकि भारत के लिए कम से कम ‘प्रायोरिटी सप्लाई’ (Priority Supply) बहाल कराई जा सके।





