इस्राइल और हमास के बीच पिछले एक साल से युद्ध जारी है। इस संघर्ष में अब हिजबुल्ला भी शामिल हो चुका है। इस्राइल के साथ इस संघर्ष को रोकने के लिए अब लेबनान और हिजबुल्ला अमेरिका के प्रस्ताव पर सहमत हो गए हैं। लेबनान के एक शीर्ष अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। हालांकि, इसे लेकर इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की गई। ईरान द्वारा समर्थित हिजबुल्ला ने युद्धविराम पर बातचीत के लिए अपने लंबे समय के सहयोगी नबीह बेरी का समर्थन किया।
संसद अध्यक्ष नबीह बेरी के सहयोगी अली हसन खलील ने अमेरिका के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “लेबनान ने सकारात्मक माहौल में पेपर पर अपनी टिप्पणी की। हमारे द्वारा प्रस्तुत सभी टिप्पणियां (यूएन) प्रस्ताव 1701 के सभी प्रावधानों के साथ सटीक पालन पुष्टि करती है।” खलील ने कहा, “इस पहल की सफलता अब इस्राइल पर निर्भर करती है। अगर इस्राइल इसका समाधार नहीं चाहता है तो यह सैकड़ों समस्याएं खड़ी कर सकता है।”इस्राइल लंबे समय से दावा कर रहा है कि सीमा पर यूएन के प्रस्ताव 1701 को कभी ठीक से लागू नहीं किया गया था। बता दें कि संयुक्त राष्ट्र परिषद के प्रस्ताव 1701 ने 2006 में हिजबुल्ला और इस्राइल के बीच पिछले युद्ध को समाप्त कर दिया था। इस प्रस्ताव के अनुसार, हिजबुल्ला को लेबनानी-इस्राइल सीमा और लितानी नदीं के बीच के क्षेत्र में कोई सशस्त्र उपस्थिति नहीं होनी चाहिए। यह सीमा से लगभग 30 किमी उत्तर में बहती है।
लेबनान ने इस्राइल पर अपने हवाई क्षेत्र में युद्धक विमान उड़ाने और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। खलील के मुताबिक इस्राइल बेरूत और हिजबुल्ला के कब्जे वाले दूसरे क्षेत्रों पर हमले कर रहा था। हालात ऐसे हैं जिसमें इस्राइल बहुत अधिक दबाव बनाकर किसी भी कीमत पर समझौता करना चाहता है।





